अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध ने शेयर बाजारों में कोहराम मचाया हुआ था, लेकिन बीते सप्ताह अचानक दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बनी और बाजार उछल पड़े. हालांकि, इसका असर विदेशी निवेशकों पर नहीं दिखा और उनका मूड खराब बना हुआ है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अप्रैल महीने के 10 दिनों में ही FPIs ने भारतीय बाजारों से 48,000 करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल लिए. इससे पहले मार्च महीने में एफपीआई ने तगड़ी बिकवाली की थी.
अप्रैल में फिर तगड़ी बिकवाली
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में ताबड़तोड़ निकासी के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अप्रैल महीने की शुरुआत से बिकवाली जारी रखी. इस बीच US-Iran Ceasefire का भी उनपर कोई असर नहीं दिखा. डिपॉजिटरी के आंकड़ों को देखें, तो अप्रैल के पहले 10 दिनों में विदेशी निवेशकों ने करीब 48,213 करोड़ रुपये निकाले हैं.
बीते 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर पहली बार स्ट्राइक की थी और इसके बाद ईरानी पलटवार से मिडिल ईस्ट युद्ध लगातार बढ़ता चला गया. इसका सीधा असर विदेशी निवेशकों के मूड पर देखने को मिला और उनकी वापसी का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है. इससे पिछले मार्च महीने में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का आंकड़ा करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये रहा था और ये महीनेभर में रिकॉर्ड निकासी है. अप्रैल की इस ताजा निकासी के साथ एफपीआई द्वारा इस साल की कुल निकासी 1.8 लाख करोड़ रुपये हो गई है.
3 महीने बाद वापसी, फिर भगदड़
गौरतलब है कि तीन महीने की तगड़ी बिकवाली के बाद बीते फरवरी महीने में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार में वापसी हुई थी और उन्होंने पिछले 17 महीनों में सबसे ज्यादा 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था. इससे पहले नवंबर 2025 में विदेशी निवेशकों ने 3,765 करोड़ रुपये, दिसंबर 2025 में 22,611 करोड़ रुपये और जनवरी 2026 में 35,962 करोड़ रुपये निकाले थे.
बेरुखी की आखिर वजह क्या?
शेयर बाजार में एफपीआई की बिकवाली के पीछे के कारणों की बात करें, तो ग्लोबल टेंशन का इसमें बड़ा रोल रहा है. मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते वेस्ट एशिया में लगातार बढ़ा तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उथल-पुथल ने FPI का मूड खराब किया है.
विदेशी निवेशकों की वापसी हाल फिलहाल होती नजर नहीं आ रही है, क्योंकि सीजफायर के बीच पाकिस्तान में हुई अमेरिका-ईरान की शांति वार्ता फेल हो चुकी है और इसका सीधा असर सोमवार को शेयर बाजार पर देखने को मिल सकता है.
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