मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब अपने चरम पर पहुंच चुका है. ईरान ने कहा है कि यदि उसके बंदरगाहों पर कोई आंच आई, तो फारस की खाड़ी या ओमान सागर में मौजूद एक भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं बचेगा. तेहरान की चेतावनी अमेरिका के उस धमकी के जवाब में आई है, जिसमें कहा गया है कि ईरान के तटीय क्षेत्रों की समुद्री नाकेबंदी की जाएगी.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ऐलान कर दिया है कि सोमवार सुबह 10 बजे से ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू हो जाएगी. इसका मतलब ये कि ईरानी बंदरगाहों पर आने या जाने वाले किसी भी देश के जहाज को अमेरिकी नौसेना रोक देगी. हालांकि, अमेरिका ने कहा है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच जाने वाले जहाजों को होर्मुज से गुजरने दिया जाएगा.

इस घोषणा के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने मोर्चा संभाल लिया है. ईरान ने कहा कि समुद्री सुरक्षा कोई एकतरफा रियायत नहीं है. ईरानी सेना ने कहा, “खाड़ी में सुरक्षा या तो सबके लिए होगी या फिर किसी के लिए नहीं.” संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने कहा कि यदि अमेरिका लड़ने का शौक रखता है, तो ईरान भी पीछे नहीं हटेगा.

सैन्य सलाहकार मोहसिन रजाई ने दावा किया कि उनके पास नाकेबंदी तोड़ने के लिए ऐसे ‘अचूक हथियार’ हैं, जिनका इस्तेमाल अभी तक दुनिया के सामने नहीं किया गया है. दरअसल, यह पूरा उबाल उस वक्त आया जब पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई अमेरिका और ईरान की उच्च-स्तरीय शांति वार्ता बुरी तरह विफल हो गई.

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिए कि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है. दूसरी ओर ईरान ने अपनी जब्त संपत्तियों को छोड़ने और अमेरिका-इजरायल के हमलों से हुए नुकसान के मुआवजे की मांग पर अड़ा रहा. इसका नतीजा ये हुआ कि अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत खत्म हो गई.

अमेरिकी नाकेबंदी की आशंका ने होर्मुज स्ट्रेट को लगभग ठप कर दिया है. जहां कभी रोज़ाना 135 जहाज गुजरते थे, वहां अब गिनती के 40 जहाज ही नजर आ रहे हैं. इसका सीधा असर दुनिया पर पड़ रहा है. अमेरिकी क्रूड ऑयल 8 फीसदी की उछाल के साथ 104.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. ब्रेंट क्रूड 102.29 डॉलर के स्तर को छू रहा है.

यदि ये नाकेबंदी लंबी खिंचती है, तो दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप इस नाकेबंदी के जरिए ईरान की आर्थिक कमर तोड़ना चाहते हैं. युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ‘डार्क रूट्स’ यानी चोरी-छिपे लाखों बैरल तेल का निर्यात कर रहा है, जिसे रोकने के लिए अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना है.

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