नोएडा में हुई हिंसा के पीछे सुनियोजित षड्यंत्र की बात सामने आ रही है. पुलिस का दावा है कि प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि पूरे घटनाक्रम को भड़काने के लिए सोशल मीडिया का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया. अफवाहों के जरिए माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश की गई, जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई.
सूत्रों के मुताबिक, हिंसा से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर झूठी और भ्रामक जानकारी तेजी से फैलाई गई. जांच में यह भी सामने आया है कि करीब 50 से अधिक फर्जी हैंडल सिर्फ 24 घंटे के भीतर बनाए गए और उन्हें अफवाह फैलाने के लिए सक्रिय किया गया. इन हैंडल्स के जरिए लगातार भड़काऊ संदेश, वीडियो और पोस्ट शेयर किए गए, जिससे लोगों के बीच भ्रम और आक्रोश बढ़ा. UP STF अब इन सभी हैंडल्स के डिजिटल फुटप्रिंट्स को ट्रैक कर रही है.
बताया जा रहा है कि इन फर्जी अकाउंट्स का उद्देश्य माहौल को अस्थिर करना और लोगों को उकसाना था. जैसे-जैसे ये पोस्ट वायरल हुईं, स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ता गया और आखिरकार यह हिंसा में बदल गया. जांच एजेंसियां अब इन सोशल मीडिया हैंडल्स की पहचान करने और इनके पीछे के नेटवर्क का पता लगाने में जुट गई हैं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) को भी सक्रिय कर दिया है. STF को विशेष रूप से उन लोगों की पहचान करने और कार्रवाई करने का जिम्मा सौंपा गया है, जो अफवाह फैलाने में शामिल थे.
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सतर्क रहें.
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