’12 हजार में गुजारा नामुमकिन, मजदूरों की मजबूरी का उठाया जा रहा फायदा’, बोले बृजभूषण शरण सिंह – BrijBhushan Sharan Singh react on laborers Low Wages problem noida violence lclam


भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने गोंडा के नंदनी नगर मिनी स्टेडियम में आयोजित विकास एवं शारीरिक प्रशिक्षण शिविर के समापन पर मजदूरों की बदहाली का मुद्दा उठाया. उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि बाहर जाकर काम करने वाले मजदूरों को मिलने वाली 11-12 हजार रुपए की मजदूरी बहुत कम है.

बृजभूषण सिंह के अनुसार, इस महंगाई में मजदूरों का रहना-खाना ही उनकी कमाई निगल जाता है, जिससे उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जाना प्रतीत होता है. उन्होंने इस स्थिति को सुधारने के लिए मजदूरी बढ़ाने की पुरजोर हिमायत की है.

मजदूरी नहीं मजबूरी का खेल

बृजभूषण सिंह ने मजदूरों के खर्चों का गणित समझाते हुए कहा कि अगर किसी को 12 हजार रुपए मिलते हैं, तो 3 से 4 हजार रुपए कमरे के किराए में चले जाते हैं. इसके बाद सामान्य भोजन पर भी 3-4 हजार रुपए खर्च हो जाते हैं. महीने के अंत में मजदूर के पास मात्र सौ-दो सौ रुपए बचते हैं. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यदि ऐसी स्थिति में मजदूर बीमार पड़ जाए, तो समझो उसका पूरा काम ही खत्म हो गया.

12 हजार रुपए सम्मानजनक नहीं

पूर्व सांसद ने साफ शब्दों में कहा कि वह बहुत ज्यादा बवाल में पड़ने वाले व्यक्ति नहीं हैं, लेकिन वह जानते हैं कि मजदूरी बहुत कम है. उन्होंने तर्क दिया कि 12 हजार रुपए में आदमी सम्मान के साथ जी नहीं सकता. जो लोग गांव छोड़कर बाहर मेहनत कर रहे हैं, उनकी मजदूरी थोड़ी बढ़ानी चाहिए. सिंह का मानना है कि वर्तमान वेतन ढांचा मजदूरों की मेहनत के साथ न्याय नहीं कर रहा है और इसे बढ़ाने की जरूरत है.

बेटी के चुनाव लड़ने पर दी सफाई

कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने उनकी बेटी के चुनाव लड़ने को लेकर सवाल पूछा, तो बृजभूषण सिंह ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि यह खबर पूरी तरह गलत है और यह सब आप (मीडिया) लोग कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि बेटी के चुनाव लड़ने के दावे में कोई सच्चाई नहीं है. इस बयान के साथ ही उन्होंने अपनी पारिवारिक राजनीति को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगा दिया.

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