पाकिस्तान बॉर्डर के पास कुनार नदी में अफगानी लोग टूट पड़े सोना खोजने, नदी-पहाड़ सब खोदने लगे अचानक – afghanistan kunar river gold panning pakistan border news ntc dhrj


अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में हिंदू कुश की पहाड़ियों के बीच इन दिनों एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है. पाकिस्तान सीमा के पास कुनार नदी के किनारे सैकड़ों लोग सोने की तलाश में जुटे हुए हैं. ये लोग नदी के सूखे हिस्सों और पहाड़ों को खोदकर सोने के कण खोजने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि अपनी रोज़ी-रोटी चला सकें. मुश्किल हालातों और पथरीले रास्तों के बावजूद, लोगों का हुजूम सुबह से शाम तक मिट्टी छानने में लगा है.

दरअसल, अफगानिस्तान में रोजगार के बड़े संकट और कम मजदूरी की वजह से लोग अब इस काम की ओर रुख कर रहे हैं. जब से यह खबर फैली है कि कुनार नदी की रेत में सोना छिपा है, तब से लोग सब कुछ छोड़कर वहां पहुंच रहे हैं. हैरानी की बात तो यह है कि कई लोग तो काबुल जैसे शहरों से अपनी पुरानी नौकरियां छोड़कर 7-7 घंटे का सफर तय कर यहां आए हैं. वहां मौजूद लोगों का साफ कहना है कि देश में काम की भारी कमी है, लिहाजा उन्होंने यह कठिन रास्ता चुना है. हालांकि, यहां मिलने वाले सोने के टुकड़े गेहूं के दाने से भी छोटे होते हैं, फिर भी हजारों लोग अपनी किस्मत आजमाने से पीछे नहीं हट रहे.

नदी के किनारे लोग दिन भर हाड़-तोड़ खुदाई में जुटे रहते हैं. पहले रेतीली जमीन को खोदा जाता है और फिर उन पत्थरों और मिट्टी को नदी के पानी से साफ किया जाता है. यह काम दिखने में जितना सीधा लगता है, हकीकत में उतना ही थका देने वाला है. उबड़-खाबड़ पहाड़ों के बीच ये लोग सिर्फ इस उम्मीद में पसीना बहा रहे हैं कि शायद मिट्टी के किसी ढेर में उनकी तकदीर चमक जाए. बता दें कि यह सिलसिला पिछले कई दिनों से बिना रुके जारी है.

पहाड़ काटकर पीठ पर लाद रहे मिट्टी

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, सोना खोजने का यह तरीका भी काफी पुराना और देसी है. गाजीबाद जैसे इलाकों में लोग ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों को कुदाल से काट रहे हैं. इसके बाद मिट्टी को बोरियों में भरकर लोग अपनी पीठ पर लादकर नीचे लाते हैं और छलनी पर रखकर नदी के पानी से धोते हैं. पानी के बहाव के साथ हल्की मिट्टी बह जाती है और सोने के भारी कण नीचे बिछी चटाई या लोहे की कड़ाही में रह जाते हैं. गौर करने वाली बात यह है कि अगर एक हफ्ता जी-जान से मेहनत की जाए, तो करीब 1 ग्राम सोना मिल सकता है. बाजार में इसकी कीमत लगभग 8,000 अफगानी तक मिल जाती है. अफगानिस्तान की मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए एक हफ्ते में इतनी कमाई होना बहुत बड़ी बात है. यही वजह है कि कुनार के इस इलाके में लोगों का भारी तांता लगा हुआ है.

आज कुनार की इस नदी के किनारे हर शख्स की आंखों में एक ही सपना है. अफगानिस्तान की जमीन के नीचे छिपे इन खजानों ने अब विदेशी कंपनियों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वहां की सत्ता संभाल रहा प्रशासन अब बड़े पैमाने पर माइनिंग को बढ़ावा देने की योजना बना रहा है. फिलहाल, कुनार की इस रेतीली जमीन पर हर कोई अपनी मेहनत और किस्मत के भरोसे उस एक सुनहरी चमक की तलाश में जुटा है जो उसकी जिंदगी बदल सके.

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