पाकिस्तान की हालत ठीक वैसी है, जैसे क्रेडिट कार्ड के जाल में फंसे एक कम सैलरी वाले कर्मचारी की हालत. जिसकी कमाई कम होती है, लेकिन शौक बड़े-बड़े होते हैं. पड़ोसी मुल्क आजकल ऐसी ही हरकत कर रहा है. खुद को खाने और देश चलाने के लिए पैसे नहीं बचे हैं, लेकिन दूसरे देशों के छगड़े सुलझाने में करोड़ों खर्च कर रहा है. इसी बीच, अगर कोई देश अपना कर्ज मांग ले, तो फिर कटोरा लेकर दूसरे देश के सामने निकल पड़ता है.
दरअसल, UAE ने कुछ दिन पहले पाकिस्तान को दिया हुआ पैसा वापस मांग लिया और जल्द वापस करने की चेतावनी भी दे डाली, फिर क्या था पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर कटोरा लेकर दर-दर भटकने लगे. पहले तो यूएई से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन जब उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा तो वह दूसरे देशों के सामने पहुंच गए.
जनरल आसिम मुनीर ईरान दौरे पर निकल पड़े ताकि वह ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करा सकें और जंग खत्म हो तो उन्हें कुछ देशों जैसे चीन, IMF और वर्ल्ड बैंक जैसी जगहों से कर्ज मिल सके. वहीं पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के दौरे पर निकले हैं और कर्ज की मांग की है.
सऊदी अरब ने कर्ज देने की बात भी कही है. कुछ रिपोर्ट में तो यह भी चर्चा है कि पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने सऊदी को अपने देश की गरीबी के बारे में रू-ब-रू कराया, तब जाकर सऊदी ने लोन देने की बात कही, नहीं तो वह पहले तैयार नहीं था.
पाकिस्तान को कितना कर्ज देगा सऊदी अरब
सऊदी अरब, पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता देगा, ताकि पड़ोसी मुल्क को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को एडवांस लोन रिपेमेंट से जुड़े अपने वित्तीय घाटे को पूरा करने में मदद मिल सके. पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने बताया कि इस अमाउंट का पेमेंट अगले हफ्ते हो जाएगा. इसके अलावा, पाकिस्तान में जमा अतिरिक्त 5 अरब डॉलर के रोलओवर व्यवस्था को भी लंबी अवधि के लिए बढ़ाने का फैसला किया गया है.
UAE को कितना देना है कर्ज?
पाकिस्तान संयुक्त अरब अमीरात को 3 अरब डॉलर के लोन का भुगतान करेगा. पहले तो पाकिस्तान ने यूएई से इसमें छूट की मांग की थी, लेकिन यूएई ने साफ तौर पर इनकार कर दिया और लोन को चुकाने की चेतावनी भी दे दी, जिसके बाद पाकिस्तान सऊदी और चीन के सामने हाथ फैलाने लगा. आखिरकार सऊदी ने लोन की मंजूरी दे ही डाली.
पाकिस्तान के पास कितना पड़ा है अमाउंट?
विदेशी मुद्रा भंडार की बात करें तो पाकिस्तान के पास 16 अरब डॉलर है, लेकिन वह इसमें से चाह कर भी ज्यादा खर्च नहीं कर सकता है, इसका बड़ी वजह है IMF की शर्तें. पाकिस्तान की शहबाज शरीफ की सरकार को IMF से आगे लोन लेने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार को वित्त वर्ष के आखिरी तक 18 अरब डॉलर जुटाने ही होंगे. साथ ही देश चलाने के लिए भी विदेशी मुद्रा भंडार भी होना जरूरी है, तभी तेल-गैस जैसी जरूरी चीजें खरीद पाएगा. इसी कारण उसने UAE का लोन देने के लिए सऊदी से लोन की मांग की थी.
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