बाहुबलियों की जंग में ट्विस्ट: टकसाल शूटआउट केस में हाईकोर्ट जाने की तैयारी में धनंजय सिंह, अभय सिंह के बरी होने पर कही ये बात – Bahubali Dhananjay Singh Move High Court Over Varanasi Taksal Shootout Case MLA Abhay Singh lclam


वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बुधवार को 4 अक्टूबर 2002 को हुए टकसाल सिनेमा शूटआउट केस में विधायक अभय सिंह और एमएलसी विनीत सिंह समेत सभी छह आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया. पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने आरोप लगाया था कि नदेसर इलाके में उनके काफिले पर अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिसमें वह स्वयं और उनके साथी घायल हुए थे. विशेष न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने मामले की सुनवाई पूरी कर यह फैसला सुनाया. फैसले के विरोध में धनंजय सिंह की लीगल टीम ने जजमेंट की डिटेल  समीक्षा शुरू कर दी है. अब वे इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देकर दोबारा न्याय की गुहार लगाएंगे.

लीगल टीम ने उठाए कोर्ट के फैसले पर सवाल

धनंजय सिंह की लीगल टीम कोर्ट के इस हालिया फैसले से बिल्कुल संतुष्ट नहीं है. टीम का मानना है कि जजमेंट की बारीकियों को देखने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी. टीम ने संकेत दिया है कि वे जल्द ही हाईकोर्ट का रुख करेंगे. धनंजय सिंह का दावा है कि उन्होंने इस केस को पूरी ईमानदारी से लड़ा है, लेकिन उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों का असर मामले की जांच और कार्रवाई पर पड़ा है.

मेडिकल रिपोर्ट और ‘अस्पताल’ थ्योरी पर विवाद

केस की सुनवाई के दौरान अभय सिंह की ओर से दलील दी गई थी कि घटना के वक्त वे अयोध्या के एक अस्पताल में भर्ती थे. धनंजय सिंह ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में कई विसंगतियां हैं. उनका आरोप है कि बचाव के लिए फर्जी मेडिकल दस्तावेज तैयार किए गए और रजिस्टर में मेडिकल एंट्री बाद में बनाई गई. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वह शामिल नहीं थे, तो उसी समय सच्चाई क्यों नहीं बताई.

‘H’ अक्षर और वाहन के दस्तावेजों में खेल

गाड़ी के नंबर को लेकर भी तीखी बहस हुई. बचाव पक्ष ने दावा किया कि वाहन नंबर जेसीबी का है, लेकिन धनंजय सिंह का कहना है कि वह जेसीबी साल 2004 में रजिस्टर हुई, जबकि हमला 2002 में हुआ था. वाहन दस्तावेजों में एक अक्षर की कमी जैसी तकनीकी गड़बड़ियों को आधार बनाकर आरोपियों को लाभ पहुंचाया गया. इसके अलावा, मोबाइल नंबरों को लेकर भी गलत जानकारी केस से जोड़ने का आरोप लगाया गया है.

दोस्ती से दुश्मनी तक का लंबा सफर

अभय सिंह और धनंजय सिंह की दोस्ती लखनऊ यूनिवर्सिटी के दिनों की थी, जो समय के साथ कट्टर दुश्मनी में बदल गई. धनंजय सिंह का कहना है कि अभय सिंह को हमेशा से ‘अनचाहा राजनीतिक लाभ’ मिलता रहा. वहीं, अभय सिंह का नाम मुख्तार अंसारी के गैंग चार्ट में होने का भी दावा किया गया. इस फैसले के बाद वाराणसी में भारी पुलिस बल तैनात रहा, लेकिन अब मामला हाईकोर्ट पहुंचने से सरगर्मी और बढ़ गई है.

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