परिसीमन से दक्षिणी राज्यों को नुकसान नहीं फायदा होगा, तेजस्वी सूर्या ने समझाया पूरा गणित – Tejasvi Surya Slams Opposition Over Delimitation Calls Concerns Misleading ntc dpmx


लोकसभा में बुधवार को प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) को लेकर तीखी बहस देखने को मिली, जहां बंगलौर साउथ लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष पर करारा हमला बोला और उनके तर्कों पर सवाल उठाए. सूर्या ने विपक्ष से पूछा, ‘आप किस आधार पर यह परिसीमन कराना चाहते हैं? क्या अमीरों के पास ज्यादा वोट होंगे और गरीबों के पास कम?’

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘आपके इस तर्क के हिसाब से तो मुकेश अंबानी के पास एक लाख वोट होंगे और हमारे जैसे लोगों के पास सिर्फ एक वोट. क्या कांग्रेस ऐसा ही तर्क देना चाहती है?’ उन्होंने विपक्ष द्वारा परिसीमन के विरोध को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया. सूर्या ने विपक्षी दलों और दक्षिण भारत की क्षेत्रीय पार्टियों, खासकर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) पर प्रोपेगेंडा करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ‘विपक्ष और दक्षिण की कुछ पार्टियां इतना शोर क्यों मचा रही हैं? उनके आंसू घड़ियाली आंसू हैं.’ चमकता सूर्य ने सदन में स्पष्ट किया कि अगर 2011 या 2027 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाया जाता तो दक्षिण भारत को नुकसान होता, लेकिन सरकार की वर्तमान योजना से दक्षिण को कोई नुकसान नहीं होगा. सूर्या ने कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार 2026 में निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक परिसीमन करेगी और विपक्ष इस प्रक्रिया को ‘सिस्टमेटिक मिसलीडिंग’ के जरिए रोकने की कोशिश कर रहा है.

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केरल, आंध्र प्रदेशतमिलनाडु को फायदा

उन्होंने समझाया कि वर्तमान में केरल में लोकसभा की 20 सीटें हैं. यदि 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन होता तो ये संख्या घटकर 14 रह जाती. लेकिन सरकार के नए फॉर्मूले से केरल की सीटें बढ़कर 30 होने जा रही हैं. इसी तरह तमिलनाडु में 39 सीटें हैं. 2011 की जनगणना के आधार पर ये सीटें बढ़कर सिर्फ 49 हो पातीं, लेकिन सरकार ने इसे 59 करने का प्रस्ताव रखा है. आंध्र प्रदेश के खाते में भी सीटों का इजाफा होगा और वहां लोकसभा की सीटें 25 से बढ़कर 37 होने की उम्मीद है.

परिसीमन संवैधानिक और जरूरी प्रक्रिया

परिसीमन को राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक दायित्व बताते हुए सूर्या ने कहा कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 81 और 82 से जुड़ी है, जो जनसंख्या के अनुपात में सीटों का संतुलन और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण का निर्देश देते हैं. उन्होंने तर्क दिया कि 1971 की जनगणना के आधार पर लंबे समय से लगी रोक के कारण अब कई निर्वाचन क्षेत्रों में जनसंख्या का असंतुलन काफी बढ़ गया है. सरकार के मुताबिक, नए परिसीमन के बाद भी संसद में दक्षिण भारत के राज्यों का कुल अनुपात वर्तमान के 23.9 प्रतिशत के बराबर ही बना रहेगा. तेजस्वी सूर्या ने कहा कि हर राज्य में सीटों को करीब 50 फीसदी बढ़ाने का फैसला ऐतिहासिक है और यह सभी के साथ न्याय सुनिश्चित करेगा. सदन में चर्चा के दौरान तेजस्वी सूर्या ने विपक्षी दलों के विरोध पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कुछ लोग केवल विरोध के लिए भ्रम फैला रहे हैं और अलगाववाद की भाषा बोल रहे हैं.

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परिसीमन पर दक्षिण के राज्यों की चिंताएं

दक्षिणी राज्यों को नुकसान होने की आशंकाओं पर जवाब देते हुए सूर्या ने कहा, ‘दक्षिण को इससे बेहतर डील नहीं मिल सकती थी.’ हालांकि दक्षिणी राज्यों के क्षेत्रीय दलों, खासकर डीएमके का कहना है कि जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण से उत्तर भारत के राज्यों को संसद में ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल सकता है और दक्षिण के राज्य इसमें पिछड़ जाएंगे. क्योंकि उत्तर भारतीय राज्यों की जनसंख्या अधिक है, इसलिए परिसीमन में उसी अनुपात में सीटें भी बढ़ेंगी. जबकि दक्षिणी राज्यों की जनसंख्या कम है इसलिए उनकी सीटें भी उसी अनुपात में बढ़ेंगी.

सरकार के पक्ष का समर्थन करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि परिसीमन जनगणना के आधार पर होगा और किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं की जाएंगी, भले ही लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना हो. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक को विभाजन के बाद पेश किया गया, जिसमें 251 वोट पक्ष में और 185 विरोध में पड़े. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने बताया कि सदन में इस पर 15 से 18 घंटे की चर्चा होगी और शुक्रवार शाम 4 बजे मतदान निर्धारित है.

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