‘भाजपा नारी को ‘नारा’ बनाना चाहती है…’, महिला आरक्षण और परिसीमन अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा – akhilesh yadav attacks bjp over women reservation bill demands census first ntcpvp


समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर बहस के दौरान सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन बीजेपी इस बिल के जरिए ‘नारी’ को नारा बनाना चाहती है. जिन्होंने नारी को अपने संगठन में नहीं रखा उनके मान सम्मान के लिए कैसे रखेंगे. जिस पैरेंटल संगठन से आप निकले हैं उसमें कितनी नारी हैं यह बता दे आप.”

परिसीमन को महिला आरक्षण से क्यों जोड़ा जा रहा है?
‘हमारी मांग है कि पहले जनगणना कराई जाए और इसके बाद महिला आरक्षण बिल लागू हो. अखिलेश यादव बोले- असल मुद्दा यह है कि भाजपा जनगणना को टालना चाहती है, खासकर जातीय जनगणना के कारण, क्योंकि अगर जातीय आंकड़े सामने आएंगे, तो आरक्षण की वास्तविक मांग और दबाव बढ़ेगा, जिसे भाजपा टालना चाहती है. यही वजह है कि महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़कर इसे लागू करने में देरी की जा रही है. इससे साफ संकेत मिलता है कि मंशा आरक्षण देने की नहीं, बल्कि उसे टालने की है.’

अखिलेश यादव ने चला पिछड़ा-मुस्लिम कार्ड
उन्होंने कहा कि ओबीसी महिलाओं को भी आरक्षण मिले. मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण मिले. भाजपा राज में सबसे ज्यादा महिलाएं दुखी हैं. संस्कार का आरंभ महिला से होता है, यदि महिला जागृत है तो पूरा समाज जागृत हो जाता है. जब तक महिलाएं राजनीति में नहीं आएगी तो सामाजिक क्रांति अधूरी रहेंगी. इसीलिए उत्तर प्रदेश में पंचायत में सबसे पहले महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने का काम समाजवादी पार्टी ने किया था.”

अखिलेश यादव ने कहा कि जनगणना के बाद परिसीमन शुरू हो. परिसीमन सिर्फ भाजपा का षड्यंत्र है. परिसीमन से चुनावी नक्शा बदलने की साजिश हो रही है. महिला आरक्षण के नाम पर जल्दबाजी किस बात की है? सच तो यह है भाजपा जातीय जनगणना को टालना चाहते हैं क्योंकि उसके बाद आरक्षण देना होगा जो भाजपा के संघी साथी देना नहीं चाहते हैं.”

दिल्ली सीएम पर भी कसा तंज
अखिलेश यादव ने कहा-  ‘हम साफ तौर पर कहते हैं कि हम महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसके साथ कुछ गंभीर सवाल भी हैं.  अखिलेश यादव ने कहा कि, भाजपा यह बताए कि 21 राज्यों में जहां उनकी सरकारें हैं, वहां कितनी महिलाएं मुख्यमंत्री हैं. दिल्ली में जो महिला नेतृत्व दिखाया जाता है, उसे भी “हाफ सीएम” कहा जाता है. सवाल यह है कि उनके पास वास्तविक अधिकार कितने हैं? देश की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा अपने ही ढांचे में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दे पा रही है? पूरे देश में इनके विधायक चुने गए हैं, लेकिन 10 प्रतिशत से ऊपर महिला प्रतिनिधित्व नहीं पहुंच पा रहा. लोकसभा में भी उनकी संख्या क्या है, यह भी सवालों के घेरे में है.

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