महिला आरक्षण बिल : बीजेपी तो हार में भी जीत देख रही है, हो रहा है नया एजेंडा सेट – women reservation debate government opposition face to face delimitation politics ntcpmr


महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन विधेयकों पर सरकार और विपक्ष के बीच लोकसभा में जोरदार बहस हुई है. सरकार की तरफ से संशोधन बिलों को बेहद जरूरी बताने की कोशिश हो रही है, विपक्ष कोई भी दलील सुनने को तैयार नहीं है. सत्ता पक्ष के पास दो-तिहाई वाले आंकड़े नहीं हैं, लेकिन वह एक ऐसा एजेंडा सेट करना चाहता है जिससे हार का हासिल जीत के रूप में दिखाई दे.

महिला आरक्षण को लेकर संशोधन बिलों पर वोटिंग से पहले नोटिफिकेशन जारी कर सरकार ने महिला आरक्षण कानून, 2023 लागू कर दिया है, ताकि अन्य संवैधानिक पेचीदगियों से बचा जा सके. अब अगर ये बिल पास नहीं हो पाते, तो महिला आरक्षण कानून, 2023 राष्ट्रीय जनगणना के बाद लागू करने की कोशिश होगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने अपने तरीके से विपक्ष को भरोसा दिलाने की कोशिश की है, लेकिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कह रहे हैं,  सच तो ये है कि ये महिला आरक्षण बिल नहीं है. महिला आरक्षण बिल तो 2023 में पारित हो चुका. ये बिल देश का चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश है.

बहरहाल विपक्ष के तमाम विरोधों के बावजूद मोदी-शाह ने सब कुछ पहले से तय रणनीति के मुताबिक ही किया है. विपक्ष चाहता था कि संसद में संशोधन बिल पेश किए जाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए. सर्वदलीय बैठक भी 29 अप्रैल या उसके बाद बुलाई जाए, जब सभी राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हो चुके हों.

फिर तो, जो सरकार कर सकती थी, सरकार ने किया. जो विपक्ष कर सकता था, विपक्ष ने किया. महिला आरक्षण संशोधन बिल और परिसीमन बिलों का यही हाल होना था, और वही हो रहा है.

मोदी की हर संभव कोशिश

महिला आरक्षण का मामला कृषि कानूनों से बिल्कुल अलग था. फिर भी सरकार की तरफ से तपस्या में कोई कमी नहीं छोड़ी गई. आपको याद होगा, तीन कृषि कानूनों को वापस लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, तपस्या में ही कोई कमी रह गई.

लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल सहित तीन विधेयकों को पेश किए जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने विरोध कर रहे विपक्ष को अपनी तरफ से तरह तरह से समझाने की कोशिश की है. क्रेडिट कार्ड से लेकर ब्लैंक चेक जैसी बातों से प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे विपक्ष को भरोसा दिलाने की कोशिश की है. केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने भी आंकड़ों के जरिए विपक्ष के सवालों का जवाब देने की कोशिश की – लेकिन, कोई फायदा नहीं हुआ.

संशोधन बिलों पर वोटिंग से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से बिल पास होने में सहयोग की अपील की. सांसदों से पहले देश की महिलाओं से मोदी ने कहा था, ‘मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अपने सांसदों को पत्र लिखें, और इस ऐतिहासिक संसद सत्र में हिस्सा लेते समय उनका हौसला बढ़ाएं.’

सोशल साइट X पर प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, मैं सभी सांसदों से कहूंगा… आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए … देश की नारीशक्ति की सेवा का, उनके वंदन का ये बहुत बड़ा अवसर है. उन्हें नए अवसरों से वंचित नहीं करिए. ये संशोधन सर्वसम्मति से पारित होगा, तो देश की नारीशक्ति और सशक्त होगी… देश का लोकतंत्र और सशक्त होगा. आइए… हम मिलकर आज इतिहास रचें. भारत की नारी को… देश की आधी आबादी को उसका हक दें.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार की तरफ से सारे शक शुबहे दूर किए जा चुके हैं, जो भ्रम फैलाए गए, उनको दूर करने के लिए तर्कबद्ध जवाब दिया गया है. हर आशंका का समाधान किया गया है. जिन जानकारियों का अभाव था, वे जानकारियां भी हर सदस्य को दी गई हैं. किसी के मन में विरोध का जो कोई भी विषय था, उसका भी समाधान हुआ है.

मोदी ने अपनी तरफ से यह भी समझाने की कोशिश की कि आजादी के इतने दशकों बाद भी भारत की महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में इतना कम प्रतिनिधित्व रहे, ये ठीक नहीं है. सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा, कृपया सोच-विचार करके पूरी संवेदनशीलता से निर्णय लें. देश की करोड़ों महिलाओं की दृष्टि हम सभी पर है, हमारी नीयत पर है, हमारे निर्णय पर है.

1. प्रायश्चित का अवसर: बिल पेश किए जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में कहा था, हम भ्रम में न रहें. हम अहंकार में न रहें. यहां मैं और तुम की बात नहीं कर रहा हूं. हम देश की नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं. ये उनका हक है. और हमने कई दशकों से उनको रोका है. आज उसका प्रायश्चित करके उस अपराध से मुक्ति पाने का अवसर है.

2. मोदी की गारंटी: विपक्ष, विशेष रूप से डीएमके नेता एमके स्टालिन को आश्वस्त करते हुए बोले, अगर गांरटी शब्द चाहिए तो मैं वह शब्द भी उपयोग करता हूं, वादा की बात करते हो तो उसे भी इस्तेमाल करता हूं. तमिल में कोई शब्द हो तो मैं उसे भी कहता हूं क्योंकि जब नीयत साफ है तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है.

3. क्रेडिट का ब्लैंक चेक: प्रधानमंत्री मोदी का कहना था, यहां कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं न कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है. इसका अगर विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा. अगर साथ चलेंगे तो किसी को भी नहीं होगा… हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने तैयार हूं… सबकी फोटो छपवा देंगे. ले लो जी क्रेडिट. सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं.

महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन का विरोध

1. बहस तो 2023 में भी हुई थी, जब संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया था. कोटे में कोटा की भी डिमांड हुई थी, ओबीसी महिलाओं को आरक्षण देने के लिए. संसद से महिला आरक्षण कानून पास होने के साथ ही सड़क पर जातीय जनगणना की मांग उठी – और आखिरकार केंद्र की कैबिनेट ने राष्ट्रीय जनगणना के साथ ही जातीय जनगणना कराए जाने की मंजूरी भी दे दी.

2. महिला आरक्षण से दिक्कत तो विपक्ष को अब भी नहीं है, लेकिन उसके साथ नत्थी किए गए परिसीमन बिल किसी भी सूरत में मंजूर नहीं हैं. चुनावों के बीच महिला आरक्षण लाए जाने को विपक्ष ने बीजेपी की राजनीतिक चाल बताया, तो तमिलनाडु में स्टालिन ने अलग ही मुहिम छेड़ दी है. डीएमके ने चुनाव कैंपेन की पूरी रणनीति ही बदल डाली है.

3. जैसा कि विपक्ष का आरोप है, बीजेपी ने महिला आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक फायदे के लिए विधानसभा चुनावों के बीच उठाया है. सबसे तगड़ा विरोध तमिलनाडु में हो रहा है, जहां मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने डीएमके का चुनाव कैंपेन परिसीमन के विरोध की दिशा में घुमा दिया है.

लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी तरफ से आंकड़ों के साथ समझाने की कोशिश की कि सीटें घटने की जगह बढ़ने जा रही हैं. अमित शाह ने कहा, एक नैरेटिव गढ़ा जा रहा है कि 3 बिलों से दक्षिण के राज्यों की लोकसभा सीटें कम हो जाएंगी. और, समझाया कि ऐसा बिल्कुल नहीं है.

1. अमित शाह ने बताया, लोकसभा की कुल 543 सीटों में दक्षिण भारत के राज्यों की 129 सीटें हैं. परिसीमन के बाद ये सीटें बढ़कर 195 हो जाएंगी. दक्षिण भारत के अन्य राज्यों का जिक्र करते हुए अमित शाह ने बताया कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु की सीटें भी मौजूदा सीटों के मुकाबले बढ़ेंगी.

2. और इस तरह, तमिलनाडु की लोकसभा सीटें 39 से बढ़कर 59 हो जाएंगी. प्रधानमंत्री मोदी की तरह अमित शाह भी, असल में, तमिलनाडु के लोगों, डीएमके और एमके स्टालिन को अपनी बात समझाना चाहते हैं. तमिलनाडु में बीजेपी विपक्षी AIADMK के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है. परिसीमन बिल के विरोध में डीएमके को फायदा ही फायदा नजर आ रहा है.

3. अमित शाह के अनुसार, मौजूदा लोकसभा में दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व 23.76 फीसदी है. और, परिसीमन के बाद बढ़कर यह 23.87 फीसदी हो जाएगा.

सरकार को अच्छी तरह मालूम था कि लोकसभा में नंबर उसके पक्ष में नहीं हैं. फिर भी मोदी और शाह संशोधन बिल के साथ आगे बढ़े. पश्चिम बंगाल चुनाव में फायदा मिले न मिले, संदेश तो पहुंच ही गया. तमिलनाडु में ज़रूर डीएमके का पलड़ा भारी लगता है. लेकिन, आंकड़ों  के जरिए समझाने की जो कोशिशें हुईं हैं, डीएमके के एजेंडे का कुछ भी काउंटर कर पाईं तो भी फायदा ही है – लब्बोलुआब ये है कि बीजेपी के लिए हार में भी जीत ही है.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *