पाकिस्तान में बिजली संकट! VIP कमरे रोशन लेकिन अस्पतालों में छाया अंधेरा, सर्जन ने किया खुलासा – Pakistan power crisis VIP rooms lit operation theatres dark Surgeon flags mdsb ntc

ByCrank10

April 18, 2026 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के एक सर्जन ने देश के गहराते बिजली संकट की कड़वी सच्चाई को उजागर किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि सर्विसेज़ हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटरों में बिजली गुल होने की वजह से अंधेरा छा गया, जबकि VIP कमरों में जनरेटर के ज़रिए बिना किसी रुकावट के बिजली मिलती रही.

एक वीडियो मैसेज में, सर्जन ने बताया कि ऑपरेशन थिएटरों में जनरेटर का ईंधन खत्म हो गया था, जबकि उस वक्त सर्जरी चल रही थीं. सर्जन ने कहा, “हम सर्विसेज़ हॉस्पिटल से हैं. यह ऑपरेशन थिएटर है, यहां तीन तरह के मरीज़ हैं और उनकी सर्जरी चल रही है. उसी वक्त जनरेटर का तेल खत्म हो गया है. VIP ब्लॉक के जनरेटर चल रहे हैं, लेकिन ऑपरेशन थिएटरों के जनरेटर बंद हो गए हैं.”

सर्जन ने आगे कहा, “हमें नहीं पता कि ये मरीज़ कैसे बचेंगे. यही इस देश की हालत है. पिछले 30 मिनट से हमें समझ नहीं आ रहा कि इन मरीज़ों के साथ क्या करें.”

गांव से शहर तक त्राहिमाम…

यह घटना ऐसे वक्त में सामने आई है, जब पाकिस्तान बिजली के भारी संकट से जूझ रहा है और देश के बड़े हिस्सों में 15 घंटे तक की बिना किसी सूचना के बिजली कटौती हो रही है. लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है और अलग-अलग शहरों के स्थानीय लोग बता रहे हैं कि बिजली कटौती आधिकारिक शेड्यूल से कहीं ज़्यादा वक्त तक हो रही है. जहां अधिकारी दावा कर रहे हैं कि शाम के वक्त जब बिजली की खपत सबसे ज़्यादा होती है, तब लोड शेडिंग सिर्फ़ 2 से 2.5 घंटे तक ही सीमित रहती है, वहीं ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है.

16 और 17 अप्रैल के बीच, शहरी इलाकों में 3 से 8 घंटे या उससे ज़्यादा वक्त तक बिजली कटौती हुई और ज्यादातर यह बिना किसी पहले से दी गई सूचना के किया गया. वहीं, ग्रामीण इलाकों में 10 से 16 घंटे या उससे भी ज़्यादा वक्त तक बिजली गुल रही. कुछ मामलों में तो करीब हर घंटे बिजली आती-जाती रही. यहां तक कि जिन इलाकों में बिजली की सप्लाई स्थिर रहने की उम्मीद थी, वहां भी बार-बार बिजली गुल होने की खबरें आई हैं, जिससे आधिकारिक योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

लाहौर और कराची जैसे बड़े शहर इस संकट से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं. LESCO के अंतर्गत आने वाले लाहौर में 3 से 8 घंटे तक बार-बार बिजली कटौती हो रही है. फ़ैसलाबाद शहर में 5 से 8 घंटे तक बिजली कटौती की खबरें हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह अवधि और भी ज़्यादा है. मुल्तान और साउथ पंजाब में सबसे लंबी बिजली कटौती हो रही है, जो 10 से 16 घंटे तक चल रही है. इस्लामाबाद और रावलपिंडी में 4 से 8 घंटे तक बिजली गुल रह रही है, जो अधिकारियों के दावों से कहीं ज़्यादा है. जबकि पेशावर और उसके आस-पास के ग्रामीण इलाकों में 10 से 16 घंटे या उससे भी ज़्यादा वक्त तक बिजली नहीं आ रही है. K-Electric से बिजली पाने वाले कराची में, इलाके के हिसाब से बिजली कटौती 2 घंटे से लेकर 12 घंटे से भी ज़्यादा वक्त तक हो रही है. इसके अलावा कसूर, झांग और बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों जैसे अन्य इलाके भी इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हैं.

यह संकट करीब 3,400 MW बिजली की भारी कमी की वजह से पैदा हुआ है. अप्रैल की शुरुआत में बिजली की मांग 9,000 MW थी, जो बढ़कर करीब 20,000 MW तक पहुंच गई है. वहीं, LNG की उपलब्धता में रुकावटों के कारण बिजली की आपूर्ति में गिरावट आई है.

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सरकार ने क्या कहा?

पाकिस्तान के संघीय बिजली मंत्री, सरदार अवैस अहमद खान लेघारी ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में चल रही मौजूदा स्थिति की वजह से LNG पर आधारित ज्यादातर बिजली संयंत्रों को होने वाली गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है. उन्होंने आगे कहा कि 6,000 MW की क्षमता वाले बिजली संयंत्र इस समय सिर्फ लगभग 500 MW बिजली का ही प्रोड्यूस कर पा रहे हैं, जिससे कुल उत्पादन में भारी कमी आई है.

इस कमी को पूरा करने के लिए, सरकार ‘फर्नेस ऑयल’ जैसे महंगे विकल्पों का सहारा ले रही है, लेकिन आपूर्ति से जुड़ी बाधाओं के कारण राहत मिलने की गुंजाइश सीमित बनी हुई है. गर्मियों में बढ़ते तापमान, पनबिजली उत्पादन में आई कमी और ईंधन की आपूर्ति में आई रुकावटों ने स्थिति को और भी बदतर बना दिया है. वहीं दूसरी तरफ, सरकार बिजली की दरों (टैरिफ) में बढ़ोतरी करने को लेकर काफी सतर्कता बरत रही है.

इस गहराते संकट के कारण जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और सरकार की बड़ी आलोचना की जा रही है. कई लोग तो इसकी तुलना पाकिस्तान में साल 2011 में आए भीषण बिजली संकट से कर रहे हैं. ‘सर्विसेज़ हॉस्पिटल’ के एक सर्जन द्वारा बयां की गई स्थिति, जरूरी सेवाओं के पूरी तरह से ठप पड़ जाने का एक जीता-जागता उदाहरण बन गई है. यह घटना इस बात को स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि मौजूदा ऊर्जा संकट न सिर्फ लोगों के दैनिक जीवन को बाधित कर रहा है, बल्कि उनकी जान को भी जोखिम में डाल रहा है.

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