Akshaya Tritiya 2026: 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया का त्योहार मनाया जाएगा. यह पर्व हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस दिन को साल का सबसे शुभ दिन या अबूझ मुहूर्त कहा जाता है. कहते हैं कि इस दिन दान-धर्म के कार्यों का फल अक्षय होता है. यानी कभी खत्म न होने वाला फल. यह भी कहा जाता है कि इस दिन शुरू किए गए कार्यों का फल अन्य दिनों की तुलना में कई गुना उत्तम होता है. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर इस तिथि को इतना दिव्य क्यों माना गया है. इस सवाल का जवाब सनातन धर्म के तमाम पवित्र ग्रंथों में छिपा हुआ है.
ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र कहते हैं कि यह तिथि कालचक्र के परिवर्तन की साक्षी है. हिंदू समय की गणना के अनुसार देखा जाए तो अक्षय तृतीया के दिन ही सतयुग का समापन हुआ था और त्रेता युग का आरंभ हुआ था. सतयुग में विष्णु जी के पहले चार अवतार हुए थे- मत्स्य, कूर्म, वराह और नृसिंह. जबकि त्रेतायुग में विष्णु के अवतार राम का प्राकट्य हुआ.
अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का भी जन्म हुआ था. हर साल अक्षय तृतीया के दिन उनका प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है. परशुराम को शस्त्र और शास्त्र का दिव्य ज्ञान प्राप्त था था. वह चिरंजीवी थे. उन्हें अमरत्व का वरदान प्राप्त था.
ऐसी मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन ही महाभारत काल में पांडवों के वनवास के दौरान भगवान सूर्य देव ने उन्हें अक्षय पात्र प्रदान किया था. इस दिव्य पात्र के कारण ही उन्हें कभी अन्न की कमी नहीं होती थी.
ग्रंथों में इसका भी वर्णन मिलता है कि अक्षय तृतीया के दिन ही द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा की दरिद्रता, गरीबी को दूर किया था. वो अक्षय तृतीया का ही दिन था, जब गरीब सुदामा श्रीकृष्ण से मिले थे. और उनके दो मुट्ठी चावल के बदले कृष्ण ने उन्हें अपार धन-दौलत का स्वामी बना दिया था.
अक्षय तृतीया 2026 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि का आरंभ 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 48 मिनट पर होगा. इस तिथि का समापन 20 अप्रैल को सुबह 07 बजकर 27 मिनट पर होगा. उदिया तिथि के कारण अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी.
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