मोबाइल फोन के आज के समय में बड़े-छोटे सभी के लिए जरूरी बन गया है, हर वक्त ही लोग अपने फोन में लगे रहते हैं और इस वजह से उनकी बॉडी में इसका नेगेटिव असर भी पड़ रहा है. अब तो बच्चे भी बिना फोन के खाना नहीं खाते हैं और यह आज के समय की सबसे बड़ी दिक्कत बन चुकी है. अब बच्चों की परवरिश पहले जैसी नहीं रही. जहां पहले खाना खाने का मतलब होता था परिवार के साथ बैठना, बातें करना और आराम से हर कौर का स्वाद लेना, वहीं अब मोबाइल, टीवी और टैबलेट ने इस समय को पूरी तरह बदल दिया है.
कई घरों में बच्चे तो बिना स्क्रीन देखे खाना ही नहीं खाते हैं और पैरेंट्स ने भी खाना खिलाने का इसे सबसे आसान तरीका समझ लिया है. मगर यह लोग इस बात से अनजान हैं कि यही आदत आगे चलकर बच्चों की सेहत पर भारी पड़ सकती है.
मुंबई के एक ऑर्थोपेडिक सर्जन और हेल्थ एजुकेटर डॉ. मनन वोरा ने इस बारे में माता-पिता को गंभीर चेतावनीदी है, उनका कहना है कि स्क्रीन देखते हुए खाना खाने की आदत बच्चों के दिमाग और शरीर दोनों पर गहरा असर डाल रही है.
स्क्रीन के साथ खाना खाना है खतरनाक
डॉ. वोरा का कहना है कि आज के बच्चे ऐसे दौर में बड़े हो रहे हैं जहां बिना मोबाइल या टीवी के खाना खाना मुश्किल हो गया है. यह सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि धीरे-धीरे उनकी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनता जा रहा है. इसका सीधा असर मोटापा और अन्य बीमारियों के तौर पर सामने आ रहा है.
कम उम्र में बढ़ रहीं बीमारियां
सबसे ज्यादा टेंशन की बात यह है कि 10 से 13 साल के बच्चों में भी अब फैटी लिवर और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं. जहां यह सभी बीमारियां पहले बड़ों में आम थीं, मगर अब बच्चों में तेजी से बढ़ रही हैं.
जब बच्चे हर बार स्क्रीन देखते हुए खाना खाते हैं, तो उनके दिमाग में यह जुड़ जाता है कि खाना तभी मजेदार है जब साथ में एंटरटेनमेंट हो. इस वजह से वो अपनी भूख को भी नहीं समझ पाते हैं, उनको यह समझ नहीं आता है कि उनका पेट भरा है या नहीं. कभी वो भूख से ज्यादा भी खा लेते हैं.
हार्मोन पर पड़ रहा असर
स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट सिर्फ आंखों पर ही असर नहीं डालती हैं, बल्कि बच्चों के शरीर के हार्मोन को भी इफेक्ट करती है. यह नींद के लिए जरूरी मेलाटोनिन को कम करती है और भूख से जुड़े हार्मोन जैसे घ्रेलिन और लेप्टिन को असंतुलित कर देती है. इसका नतीजा यह होता है ज्यादा भूख लगना, मीठे की क्रेविंग्स बढ़ना और पेट भरने का एहसास न होना.
जंक फूड और डोपामिन का चक्कर
स्क्रीन स्क्रॉल करना और जंक फूड खाना, दोनों ही दिमाग में डोपामिन नाम के केमिकल को बढ़ाते हैं, जो खुशी का एहसास देता है. जब ये दोनों साथ में होते हैं तो बच्चे बार-बार वही चीजें करने लगते हैं. इससे जंक फूड की लत लग सकती है और इसी वजह से आजकल के बच्चे जंक फूड खाना ज्यादा पसंद करते हैं.
इन बातों का रखें ध्यान
पैरेंट्स बच्चे को जल्दी खाना खिलाने के चक्कर में उनके हाथों में फोन पकड़ा देते हैं, जो आने वाले वक्त में उनकी हेल्थ के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकता है. इसलिए अभी से इस बात को छोड़ दें. इसके साथ ही इन बातों का भी खास ध्यान रखें.
- खाने के समय स्क्रीन पूरी तरह बंद रखें
- परिवार के साथ बैठकर खाना खाने की आदत डालें
- बच्चों को धीरे-धीरे और ध्यान से खाने की आदत डालें
- जंक फूड की जगह हेल्दी ऑप्शन दें
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