मुरादाबाद के मुंडापांडे थाना क्षेत्र के दलपतपुर गांव में बीती रात आई तेज़ आंधी-तूफान ने ऐसा कहर बरपाया कि एक हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए बिखर गया. एक मामूली सी रात, जो आम दिनों की तरह गुजरनी थी, अचानक चीखों और सन्नाटे में बदल गई. इदरीस और उनकी पत्नी फात्मा अपने घर के आंगन में सुकून से सो रहे थे. उन्हें क्या पता था कि यही रात उनकी जिंदगी की आखिरी रात साबित होगी. आधी रात के बाद तेज़ हवाओं ने रफ्तार पकड़ी और देखते ही देखते पड़ोसी के मकान की दीवार भरभराकर उनके ऊपर गिर पड़ी.

मलबे में दबे दोनों को जब तक बाहर निकाला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. परिजन उन्हें आनन-फानन में अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इस हादसे ने सिर्फ दो जिंदगियां ही नहीं छीनीं, बल्कि 8 मासूम बच्चों के सिर से हमेशा के लिए मां-बाप का साया भी छीन लिया. सबसे दर्दनाक बात यह रही कि बच्चे उसी आंगन के दूसरे कोने में सो रहे थे, बस कुछ कदमों की दूरी ने उन्हें जिंदा रखा, लेकिन उनके मां-बाप को नहीं बचा सकी.

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घटना के बाद गांव में पसरा मातम
सुबह होते ही दलपतपुर गांव में मातम का सन्नाटा छा गया. हर आंख नम है, हर दिल बोझिल. घर का आंगन, जहां कभी बच्चों की हंसी गूंजती थी, आज मलबे और चीखों की गवाही दे रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर दीवार की हालत पहले देख ली जाती या दंपति थोड़ी दूरी पर सोते, तो शायद यह हादसा टल सकता था. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

फिलहाल प्रशासन मामले की जांच में जुटा है. परिजन ने बताया कि “सब कुछ एक पल में खत्म हो गया… हमें समझ ही नहीं आया क्या हुआ. बस तेज आवाज आई और जब तक हम पहुंचे, सब खत्म हो चुका था.”

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