भारत सरकार ने स्मार्टफोन और आधार ऐप को लेकर एक फैसला लिया है. सरकार ने स्मार्टफोन पर आधार ऐप को अनिवार्य बनाने के अपने प्रस्ताव को वापस ले लिया है. इसकी जानकारी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में दी. सरकार चाहती थी कि सभी स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर आधार ऐप को सभी स्मार्टफोन में प्री इंस्टॉल करके दें. ताकि आधार ऐप की पहुंच सभी भारतीयों तक हो सके.
साल की शुरुआत में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आईटी मंत्रालय से कहा था कि वह स्मार्टफोन निर्माताओं जैसे Apple, Google और सैमसंग से बात करें. UIDAI चाहता है कि भारत में बिकने वाले सभी नए स्मार्टफोन में आधार ऐप पहले से इंस्टॉल किया जा सके. इसकी मदद से सभी भारतीयों तक आधार ऐप पहुंच सके और उनका काम आसान बना सके.
आधार क्या है?
आधार, जो फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन से जुड़ी 12 अंकों की डिजिटल पहचान है. पहले से ही 1.34 अरब से ज्यादा लोगों द्वारा बैंकिंग, टेलीकॉम वेरिफिकेशन और एयरपोर्ट एंट्री जैसी सेवाओं के लिए आधार कार्ड का यूज हो रहा है.
आईटी मंत्रालय ने प्रस्ताव का रिव्यू किया और फिर उससे पीछे हटने का फैसला किया. हालांकि UIDAI ने यह नहीं बताया है कि आखिर अपने फैसले से पीछे क्यों हटे.रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय भी कोई रिएक्शन नहीं दिया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय ने यह फैसला कई इलेक्ट्रोनिक्स और स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर से बातचीत के बाद लिया है. इसमें उनकी अहम भूमिका रही है.
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दो साल में 6 बार प्रस्ताव वापस लिया
सरकार ने पहली बार ऐसा नहीं किया है कि अपना प्रस्ताव वापस ले लिया हो. बीते दो सालों में यह छठी बार हुआ है जब सरकार ने स्मार्टफोन में सरकारी ऐप्स को प्री-इंस्टॉल कराने की कोशिश की, लेकिन हर बार डिवाइस निर्माताओं ने इसका विरोध किया.
कंपनियां लगातार सवाल खड़ा करती हैं
स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां लगातार यूजर प्राइवेसी, डिवाइस सिक्योरिटी और कंपैटिबिलिटी को लेकर सवाल खड़ी करती है. साथ ही उत्पादन लागत बढ़ने का हवाला देते हैं. रिपोर्ट में ये भी बताया है कि Apple और Samsung ने खास तौर पर सुरक्षा और सेफ्टी से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता जाहिर की है.
संचार साथी का मामला
दिसंबर में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जब सरकार ने कुछ समय के लिए स्मार्टफोन में टेलिकॉम ऐप संचार साथी अनिवार्य किया था. हालांकि विरोध के बाद कुछ दिन बाद ही सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया था.
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