अमेरिकी डेलिगेशन सोमवार को दूसरे दौर की शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद जाने की तैयारी कर रहा है, इस बीच ईरान ने अपना डेलिगेशन भेजने से इनकार कर दिया है. ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी आईआरएनए (IRNA) ने रविवार देर रात इसकी जानकारी दी. ईरान के इस फैसले से करीब दो महीने से चल रहे युद्ध के बीच लागू दो हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है.
ईरान ने वार्ता में शामिल न होने के लिए सीधे तौर पर अमेरिका की नाजायज मांगों को जिम्मेदार ठहराया है. IRNA के मुताबिक, ईरान ने कहा कि अमेरिका की ‘अत्यधिक मांगें, अवास्तविक अपेक्षाएं, बार-बार रुख बदलना और विरोधाभासी बयान’ इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं. साथ ही, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और अपने बंदरगाहों पर जारी अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को भी युद्धविराम का उल्लंघन बताया है.
ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने रविवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में अमेरिका के रुख की आलोचना करते हुए उसे बचकाना और असंगत बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका एक तरफ युद्धविराम और बातचीत की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ दबाव बनाकर सख्त रवैया अपनाता है. इससे पहले व्हाइट हाउस ने कहा था कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद जाने की तैयारी कर रहे हैं. पहले दौर की वार्ता में भी इन्हीं तीनों ने अमेरिका का प्रतिनिधित्व किया था.
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में कहा था कि अमेरिकी वार्ताकार सोमवार को इस्लामाबाद पहुंचेंगे, जिससे 22 अप्रैल को समाप्त होने वाले युद्धविराम से पहले किसी समझौते की उम्मीद जगी थी. हालांकि अब ईरान के इस फैसले के बाद बातचीत की संभावना लगभग खत्म होती नजर आ रही है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है.
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