ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पाकिस्तान की भूमिका पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है. एक प्रमुख विश्लेषक के जरिए प्रसारित रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं में पाकिस्तान तटस्थ रहने के बजाय वॉशिंगटन की तरफ झुक रहा है. ईरान सबसे ज्यादा पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर के रुख को लेकर नाराज है. तेहरान का दावा है कि मुनीर ने ईरान का प्रस्ताव अमेरिका तक पहुंचाने का जिम्मा लिया था, लेकिन अब तक वॉशिंगटन से कोई साफ और सटीक प्रतिक्रिया नहीं मिली है.
ईरान का मानना है कि मध्यस्थता का पूरा ढांचा इस तरह तैयार किया गया है, जिससे अमेरिका को फायदा हो और ईरान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग किया जा सके.
इस अविश्वास ने दोनों देशों के बीच संवेदनशील कूटनीतिक संबंधों को एक नाजुक मोड़ पर खड़ा कर दिया है.
असीम मुनीर पर संगीन आरोप!
ईरानी टीवी के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने तेहरान की यात्रा के दौरान ईरान का ड्राफ्ट प्रस्ताव हासिल किया था. हालांकि, तेहरान का आरोप है कि उन्होंने इस प्रस्ताव को अमेरिकी पक्ष के सामने सही ढंग से नहीं रखा या अमेरिका की प्रतिक्रिया को स्पष्ट नहीं किया. ईरान ने मुनीर पर आरोप लगाया है कि वह निजी तौर पर ईरान से जुड़े हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से और कूटनीतिक रूप से अमेरिका के हितों की पैरवी कर रहे हैं.
एक बड़ा विवाद ईरान के उस 10-सूत्रीय ढांचे को लेकर है, जिसे अमेरिका ने कथित तौर पर दरकिनार कर दिया है. ईरानी विश्लेषक का दावा है कि जेडी वेंस और अमेरिकी प्रशासन अब ईरान के प्रस्ताव के बजाय अपनी 15-16 मांगों की नई लिस्ट पर बातचीत का दबाव बना रहे हैं. तेहरान इसे एक अनुचित शर्त मानता है और पाकिस्तान की आलोचना कर रहा है कि उसने एक मध्यस्थ के रूप में ईरान के हितों और पहले से तय ढांचे की हिफाजत नहीं की.
यह भी पढ़ें: सीजफायर के लिए क्यों मजबूर डोनाल्ड ट्रंप?
तेहरान ने पाकिस्तान पर ‘मीडिया और मनोवैज्ञानिक दबाव’ बनाने का भी आरोप लगाया है. ईरान का कहना है कि इस्लामाबाद सार्वजनिक रूप से यह प्रचार कर रहा है कि बातचीत बहुत जल्द शुरू होने वाली है, जबकि ईरान ने मौजूदा स्थितियों में शामिल होने से इनकार किया है. ईरानी टीवी के मुताबिक, यह पाकिस्तान की एक चाल है, जिससे ईरान को शांति के खिलाफ दिखाया जा सके और जेडी वेंस जैसे अमेरिकी नेताओं को कूटनीतिक बढ़त (नैरेटिव विन) दिलाई जा सके.
विफलता की ओर बढ़ती बातचीत?
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर मध्यस्थ ‘बिल्कुल बीच में’ खड़ा नहीं होता है, तो पूरा प्रोसेस फेल हो जाएगा. तेहरान को डर है कि मौजूदा व्यवस्था में बातचीत की मेज पर बैठने का मतलब सिर्फ अमेरिका द्वारा ईरान की मांगों को खारिज करना होगा. पाकिस्तान द्वारा ईरान की चिंताओं और पिछली घटनाओं को नजरअंदाज करना भी इस अविश्वास का एक बड़ा कारण बनकर उभरा है.
—- समाप्त —-

