कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने ऑनलाइन IPL सट्टेबाजी के एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस ने मौके से ₹3 करोड़ 91 लाख 50 हजार नकद बरामद कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह का मुख्य सरगना अब भी फरार है. मामले में पुलिस के साथ आयकर विभाग की कार्रवाई भी जारी है.
मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी
संत नगर चौराहे पर चेकिंग के दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि गोविंद नगर पुल के नीचे एक सफेद सोनेट कार में बैठे दो युवक मोबाइल ऐप के जरिए IPL मैचों पर बड़े स्तर पर सट्टा चला रहे हैं. सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने तत्काल घेराबंदी कर दबिश दी और मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.
मोबाइल डेटा से खुला नेटवर्क
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कार्तिक लखवानी और राजकुमार के रूप में हुई. उनके मोबाइल फोन की जांच में सट्टेबाजी से जुड़े ऐप, वेबसाइट, व्हाट्सएप चैट और लेन-देन के विस्तृत रिकॉर्ड मिले, जिससे उनके अवैध नेटवर्क का खुलासा हुआ. पूछताछ में दोनों ने बताया कि उनके अन्य साथी किदवई नगर स्थित एक किराए के मकान से बड़े पैमाने पर सट्टा संचालन कर रहे हैं.
किदवई नगर में दूसरी दबिश, तीन और गिरफ्तार
सूचना के आधार पर पुलिस ने विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए किदवई नगर में छापा मारा. वहां तीन अन्य आरोपी- कल्पेश, रवि नाई और विष्णु (सभी निवासी गुजरात)- मोबाइल फोन के जरिए सट्टा संचालन करते पकड़े गए. पुलिस को देखकर वे साक्ष्य छिपाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन टीम ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
भारी मात्रा में नकदी और उपकरण बरामद
मौके से भारी मात्रा में नकदी, मोबाइल फोन और सट्टेबाजी से जुड़े उपकरण बरामद किए गए. गिनती में कुल ₹3,91,50,000 नकद मिला. इससे स्पष्ट होता है कि गिरोह लंबे समय से सुनियोजित तरीके से अवैध सट्टेबाजी चला रहा था.
सरगना फरार, महाराष्ट्र से ऑपरेट हो रहा था नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, गिरोह का मुख्य सरगना मनीष उर्फ ‘प्रोफेसर’ है, जो महाराष्ट्र से “Bet Hub 24” नामक मोबाइल ऐप के जरिए पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था. आरोपी एक लाख रुपये तक की रकम ऑनलाइन ट्रांसफर करते थे, जबकि इससे अधिक का लेन-देन नकद में किया जाता था. इस काम के लिए युवकों को 13 से 20 हजार रुपये मासिक वेतन पर रखा गया था.
कानपुर पुलिस ने इनकम टैक्स को पत्र लिखकर इस पूरी रैकेट की जांच करने के लिए कहा है. यह पैसा भी आयकर विभाग को सौंप दिया जाएगा और उनकी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस सफल कार्रवाई पर पुलिस आयुक्त ने खुलासा करने वाली टीम को ₹50,000 का नगद पुरस्कार देने की घोषणा की है.
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