गर्मी अपने कड़े तेवर दिखाने लगी है और इस मौसम में लोगों के पसंद रहने वाली डाइट कोक दुकानों से गायब नजर आ रही है. इस चीज की देश में जोरदार डिमांड है, लेकिन मुंबई, बेंगलुरु, पुणे हो या फिर अहमदाबाद, जिन दुकानों में आमतौर पर गर्मी में ये कैन भरी हुई नजर आती थीं, वहां अब या तो स्टॉक कम हो गया है या बिल्कुल खत्म हो गया है.
इससे परेशान ग्राहक सोशल मीडिया पर भी इसकी वजह पूछते नजर आ रहे हैं. आइए जानते हैं कैसे अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते बढ़ी मिडिल ईस्ट टेंशन एलपीजी क्राइसिस के बाद अब डाइट कोक संकट गहरा गया है और इसका बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.
क्यों पैदा हुआ ये संकट?
देश में Diet Coke संकट के पीछे की वजह को जानें, तो इसका मिडिल ईस्ट युद्ध से कनेक्शन साफ नजर आता है. फिलहाल के हालात देखें, तो एल्युमिनियम के डिब्बों की कमी, बढ़ती डिमांड और ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट ने इस चीज की कमी को और भी बढ़ाने का काम किया है. दरअसल, इन सभी कारकों के एक साथ आ जाने से स्थिति और भी ज्यादा खराब हो गई है, जबकि गर्मी के मौसम पर ठंडे पेय पदार्थों की खपत चरम पर होती है.
इस क्राइसिस के लिए जिम्मेदार एल्युमिनियम कैन की भारी कमी है, जिनका इस्तेमाल न सिर्फ डाइट कोक बल्कि अन्य तमाम ठंडे पेय पदार्थों के लिए किया जाता है.
ग्लोबल टेंशन ने बढ़ा दी मुसीबत
Diet Coke Crisis के लिए कहीं नहीं कहीं अमेरिका-ईरान में जारी युद्द से मिडिल ईस्ट में पैदा हुई टेंशन भी जिम्मेदार है, जो इस समस्या को और भी जटिल बना रहा है. जियो पॉलिटिकल तनाव के चलते शिपिंग रूट्स बाधित हुए हैं और माल ढुलाई की लागत कई गुना बढ़ गई है. इसके चलते एल्युमीनियम के डिब्बे और कच्चे माल के आयात में देरी का भी सामना करना पड़ रहा है.
वैश्विक स्तर पर लंदन मेटल एक्सचेंज में एल्युमीनियम की कीमतें इस महीने की शुरुआत में करीब चार साल के हाई लेवल 3,672 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई हैं. भारत में इसका भाव करीब 375 रुपये प्रति किलो हो गया है. रॉयटर्स के मुताबिक, ग्लोबल एल्युमीनियम मार्केट को एक बड़ा झटका लगा है.
Middle East में लगभग 70 लाख मीट्रिक टन एल्युमीनियम गलाने की क्षमता है, जो वैश्विक आपूर्ति का लगभग 9% है. हालांकि यह क्षेत्र उत्पादन में टॉप पर भले ही नहीं है, लेकिन यहां पैदा होने वाली रुकावटों का ग्लोबल ट्रेड फ्लो और सप्लाई चेन पर बड़ा असर होता है. रिपोर्ट में उम्मीद जताई जा रही है कि अगर Hormuz Strait जैसे महत्वपूर्ण रूट्स को लेकर मामला नहीं सुलझता है कि तो आपूर्ति और भी कम हो सकती है.
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