तीन बार NEET में फेल. JEE में कोई रैंक नहीं. कंप्यूटर साइंस का बैंकग्राउंड नहीं. ऐसे में ज्यादातर लोग हार मान लेते हैं. लेकिन संजय बी ने ऐसा नहीं किया. उन्होंने अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाई और आज वे आज वे पुणे में सिंजेंटा में एसोसिएट डेटा साइंटिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं लेकिन इससे भी ज्यादा खास बात ये है कि उन्होंने यह मुकाम इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर नहीं पाया बल्कि IIT मद्रास के डेटा साइंस और एप्लीकेशन में BS के ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम में एडमिशन लेकर हासिल किया है, जो पूरे भारत में छात्रों के लिए नए इतिहास बना रहा है.
कैसे IIT मद्रास से ग्रेजुएशन की डिग्री ने बदली जिंदगी?
जब संजय ने IIT मद्रास के BS प्रोग्राम में एडमिशन लिया, तब उन्हें कोडिंग की बिल्कुल नॉलेज नहीं थी. लेकिन वे शुरुआत से सीखने के लिए तैयार थे. उन्होंने IIT के ऑनलाइन मॉडल के जरिए पायथन और जावा से लेकर SQL, डेटा स्ट्रक्चर और मशीन लर्निंग जैसे मुश्किल लगने वाले विषयों पर अपनी पकड़ बना ली. आईआईटी मद्रास ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि संजय को टीडीएस और एमएलपी कोर्स काफी प्रैक्टिकल लगे. एमएलटी उनके लिए सबसे मुश्किल था, जिसमें उन्हें मेहनत करनी पड़ी. लेकिन आखिरकार उन्होंने न सिर्फ नए स्किल सीखे बल्कि एक स्पोर्टिव एनवायरनमेंट भी पाया.
18 साल की उम्र से शुरू किया काम…
बता दें कि संजय ने 18 साल की उम्र में काम करना शुरू किया. पिछले कुछ सालों में उन्होंने बैंकिंग और फाइनेंस क्षेत्र में टेलीसेल्स से लेकर टीमों का नेतृत्व करने और क्रेडिट कार्ड के लक्ष्यों को पूरा करने तक कई भूमिकाएं निभाई हैं. इतनी ही नहीं उन्होंने एसबीआई कार्ड्स, कोटक महिंद्रा बैंक और कैलिबेहर में काम किया और इस दौरान उन्होंने लोगों से भी कई तरह की स्किल सीखी. साथ ही उन्होंने दो ग्रेजुएशन डिग्रियां भी हासिल कीं. पहली आईआईटी मद्रास से डेटा साइंस और दूसरी यूनिवर्सिटी ऑफ द पीपुल्स से हेल्थ साइंस में. इतना ही नहीं उन्होंने अप्रैल 2025 से वर्ल्डक्वांट यूनिवर्सिटी में फाइनेंशियल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री के लिए भी एडमिशन लिया.
केवल पढ़ाई नहीं बल्कि स्किल भी…
आईआईटी मद्रास में संजय ने न सिर्फ परीक्षाएं पास कीं बल्कि कई नई चीजें भी बनाईं. एआई वेब ऐप्स से लेकर प्रेडिक्टिव मॉडल्स तक, उनके प्रोजेक्ट्स में आरएजी सिस्टम, एसक्यूएल,फ्लास्क और वू.जेएस जैसी स्किल्स शामिल थीं. उनका एक बेहतरीन मॉडल गुडविल एआई था, जो लोगों के सवालों को समझकर सही कैटेगरी में रखता है और पॉलिसी डॉक्यूमेंट से जवाब ढूंढता है. इसके अलावा उन्होंने घरेलू सेवाओं और चाय की दुकानों के बिजनेस का विश्लेषण करने के लिए भी ऐप बनाए.
GitHub और LinkedIn पर उनकी प्रोजेक्ट लिस्टिंग में शामिल हैं- गुडविल एआई (RAG सिस्टम, Vue.js, Flask),टी फ्रैंचाइज ऑप्टिमाइजेशन (बिजनेस डेटा प्रोजेक्ट), हाउसहोल्ड सर्विसेज ऐप (फुल स्टैक, पायथन, फ्लास्क), और कंक्रीट की मजबूती का मॉडल. इन प्रोजेक्ट्स ने सीधे तौर पर सीआईआई इंस्टीट्यूट ऑफ लॉजिस्टिक्स में उनकी इंटर्नशिप और अब सिंजेंटा में उनकी भूमिका में योगदान दिया, जहां वह समस्याओं को हल करने के लिए मशीन लर्निंग का उपयोग करते हैं.
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