कभी गम, कभी ‘खुशी’! बिकरू कांड में 30 महीने जेल में रहीं खुशी दुबे ने फर्स्ट डिव‍िजन में पास किया इंटर – khushi dube passes intermediate exam with 61 percent after bikru case edmm


हाथों में लगी शादी की मेहंदी अभी सूखी भी नहीं थी कि जिंदगी सलाखों के पीछे पहुंच गई. जिस उम्र में लड़कियां अपने भविष्य के सपने बुनती हैं, उस उम्र में खुशी दुबे कोर्ट की तारीखों और वकीलों की फाइलों के बीच अपना वजूद तलाश रही थीं. लेकिन 30 महीनों की जेल और बिकरू कांड की उस काली परछाईं ने उनके भीतर के हौसले को टूटने नहीं दिया.

कल जब यूपी बोर्ड का रिजल्ट आया, तो खुशी की आंखों में आंसू थे, पर ये आंसू गम के नहीं बल्कि एक नई शुरुआत के थे. मां की बीमारी और कानूनी लड़ाई के बीच 61% अंकों के साथ फर्स्ट ड‍िव‍िजन में इंटर पास कर खुशी ने बता दिया है कि अंधेरा चाहे कितना भी गहरा हो, पढ़ाई की लौ से उसे मिटाया जा सकता है.

खुशी दुबे के विषयवार अंक भी सामने आए हैं. उन्हें हिंदी में 66, अंग्रेजी में 49, इतिहास में 41, सिविक्स में 73 और समाजशास्त्र में 75 अंक मिले हैं. उन्होंने अपने प्रदर्शन पर संतोष जताते हुए आगे की पढ़ाई जारी रखने की बात कही है.

जेल से रिहाई के बाद पढ़ाई की शुरुआत

वर्ष 2020 में हुए बिकरू कांड के बाद खुशी दुबे का नाम आरोपी के रूप में सामने आया था. उनकी शादी घटना से ठीक तीन दिन पहले गैंगस्टर अमर दुबे से हुई थी, जो बाद में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया. घटना के बाद पुलिस ने उन्हें भी गिरफ्तार कर जेल भेजा था. करीब 30 महीने जेल में रहने के बाद अदालत से जमानत मिलने पर खुशी ने फिर से पढ़ाई शुरू की. उन्होंने इंटरमीडिएट में दाखिला लेकर अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाया और अब परीक्षा पास कर ली है.

कठिन हालात में की तैयारी, अब बनेंगी वकील?
खुशी दुबे के अनुसार, उन्होंने कोर्ट की तारीखों, वकीलों के चक्कर और अपनी मां के इलाज के बीच परीक्षा की तैयारी की. इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने सफलता हासिल की. खुशी दुबे ने बताया कि उनका लक्ष्य आगे चलकर कानून की पढ़ाई करना और एक सक्षम वकील बनना है, ताकि न्याय व्यवस्था में अपना करियर बना सकें.

कौन हैं खुशी दुबे और क्या है बिकरू कांड?
यह घटना 2 जुलाई, 2020 की रात कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में हुई थी. इसीलिए इसे बिकरू कांड कहा जाता है. इस कांड का मास्टरमाइंड कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे था, जिस पर दर्जनों आपराधिक मामले दर्ज थे. उस रात पुलिस की एक टीम विकास दुबे को गिरफ्तार करने उसके घर दबिश देने गई थी लेकिन विकास और उसके गुर्गों ने घर की छतों से पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी.

इस मुठभेड़ में एक क्षेत्राधिकारी (CO) सहित 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे. फिर घटना के कुछ दिनों बाद विकास दुबे को उज्जैन से गिरफ्तार किया गया, लेकिन कानपुर लाते समय कार पलटने के बाद वो भागा और पुलिस एनकाउंटर में मारा गया. इस पूरे मामले में विकास के कई साथी भी मारे गए और कई (जिनमें खुशी दुबे भी शामिल थीं) जेल भेजे गए.

बता दें कि खुशी दुबे इसी मामले के आरोपी अमर दुबे (विकास दुबे का करीबी) की पत्नी हैं. अमर दुबे भी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था. खुशी की गिरफ्तारी इस आधार पर हुई थी कि वह उस घर में मौजूद थीं और उन पर साजिश में शामिल होने का संदेह था, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई.

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