प्रेस कॉन्फ्रेंस से रोड शो तक: अमित शाह के साथ एक दिन- भीड़, पसीना, सियासत और जमीनी हकीकत का आंखों देखा हाल – bengal election amit shah press conference road show north 24 paragana ntc drmt iwth


रात को हम दिन भर की थकान के बाद सोने की तैयारी कर ही रहे थे कि तभी एक मैसेज आया. अगली सुबह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं. मन में तुरंत सवाल उठा- पहले चरण की वोटिंग के बाद आखिर गृह मंत्री ऐसा क्या कहने वाले हैं? यही सोचते-सोचते कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला.

सुबह उठते ही बिना वक्त गंवाए तैयार हुए. कैमरा, ट्राइपॉड और बाकी जरूरी सामान उठाया और सीधे उस जगह के लिए निकल पड़े, जहां गृह मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस होनी थी. वहां पहुंचते ही माहौल अलग नजर आया. एंट्री से पहले सभी पत्रकारों के लिए सख्त सुरक्षा जांच हो रही थी.

एक-एक कर सभी का सिक्योरिटी पास बनाया जा रहा था. पूरी जांच के बाद ही अंदर जाने की अनुमति दी जा रही थी. सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद हमने अपना कैमरा सेट किया और गृह मंत्री के आने का इंतजार करने लगे. तभी नजर सामने लगे एक बड़े पोस्टर पर पड़ी- ‘भय आउट, भरोसा इन.’

‘बदलाव’ के लिए वोटिंग

ये सिर्फ एक नारा नहीं था, बल्कि पूरे चुनावी माहौल का संकेत भी दे रहा था. कुछ ही देर बाद गृह मंत्री अमित शाह मंच पर पहुंचे और प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू की. शुरुआत में ही उन्होंने कहा कि पहले चरण में हुई भारी वोटिंग साफ संकेत दे रही है कि बंगाल की जनता ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया है और ये वोट ‘बदलाव’ के लिए है.

अमित शाह ने ये भी कहा कि राजनीतिक हिंसा के मामलों में इस बार बड़ी कमी आई है. जहां पहले हजारों लोग घायल होते थे, वहीं इस बार घटनाएं बेहद कम हुई हैं. उनके मुताबिक ये इस बात का संकेत है कि लोगों के मन से डर खत्म हो रहा है और लोकतंत्र पर भरोसा बढ़ रहा है.

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प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक महिला पत्रकार के सवाल पर उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि ‘आप भी बीजेपी को वोट दीजिए.’ बस, इतना सुनते ही हॉल में मौजूद पत्रकारों के बीच हंसी गूंज उठी और माहौल कुछ पल के लिए हल्का हो गया.

उत्तर 24 परगना में अमित शाह का बड़ा रोड शो

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद गृह मंत्री ने पश्चिम बंगाल में दो बड़ी जनसभाओं को संबोधित किया और फिर शाम को उत्तर 24 परगना में एक बड़ा रोड शो तय था. रोड शो शाम करीब 5 बजे शुरू होना था. पिछले दिन थोड़ी देरी हो गई थी, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा हुई थी. इस बार गृह मंत्री समय पर पहुंचे और करीब 5:15 बजे रोड शो शुरू हो गया.

जैसे ही अमित शाह मौके पर पहुंचे, बीजेपी नेताओं ने उनका स्वागत फूल-मालाओं से किया. इसके बाद वो एक छोटे ट्रक पर सवार हुए, जो रोड शो के लिए तैयार था. ट्रक पर चढ़ते ही चारों तरफ से नारे गूंजने लगे. माहौल इतना ऊर्जावान था कि किसी एक आवाज को अलग से सुन पाना मुश्किल था.

रोड शो में लोगों का हुजूम

भीड़ का अंदाजा लगाना भी मुश्किल था- लोग सड़कों पर, बालकनियों में, छतों पर, हर जगह मौजूद थे. हर कोई सिर्फ एक झलक पाने के लिए बेताब था. जैसे ही रोड शो आगे बढ़ा, भीड़ और घनी होती गई. एक जगह रास्ता इतना संकरा था कि गृह मंत्री लोगों के घरों के बिल्कुल पास से गुजर रहे थे. ऐसा लग रहा था कि अगर कोई हाथ बढ़ा दे, तो सीधे उनसे मिल सकता है.

लोग छतों से हाथ हिला रहे थे, मोबाइल कैमरे हवा में उठे हुए थे. हर कोई उस पल को कैद करना चाहता था. हम भी लगातार उनके साथ-साथ चल रहे थे. मन में उम्मीद थी कि शायद इंटरव्यू का मौका मिल जाए. तभी अचानक उनके एक सहयोगी ने इशारा किया- ‘ऊपर आ जाइए.’

‘पूर्ण बहुमत की सरकार बनने जा रही है’

भीड़ के धक्कों के बीच, पसीने से भीगी शर्ट और भारी उपकरण संभालते हुए किसी तरह ट्रक पर चढ़ पाए. ऊपर पहुंचते ही चारों तरफ का दृश्य और भी भव्य नजर आया- मानो पूरा इलाका सिर्फ एक ही नाम में डूबा हो. मैंने तुरंत इंटरव्यू शुरू किया और पहला सवाल यही पूछा,’ये इलाका विरोधी दल का गढ़ माना जाता है, लेकिन भीड़ कुछ और ही कहानी बता रही है, क्या ये संकेत बदलाव का है?’

गृह मंत्री ने जवाब दिया, ‘इस बार जनता परिवर्तन के लिए वोट कर रही है और पूर्ण बहुमत की सरकार बनने जा रही है.’

इंटरव्यू के दौरान ये साफ महसूस हो रहा था कि लगातार रैलियों और भाषणों का असर उनकी आवाज पर पड़ा है. आवाज में हल्की भारीपन और थकान झलक रही थी. जब मैंने पूछा, क्या आपकी तबीयत ठीक है? उन्होंने मुस्कुराकर कहा, ‘तबीयत ठीक है, बस गला थोड़ा खराब है.’

करीब 4–5 सवालों के बाद इंटरव्यू खत्म हुआ और फिर हमें ट्रक से नीचे उतरना पड़ा. लेकिन नीचे उतरना आसान नहीं था. ट्रक के चारों तरफ इतनी भीड़ जमा हो चुकी थी कि एक कदम आगे बढ़ाना भी मुश्किल हो गया था.

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किसी तरह लोगों को समझाते हुए हम भीड़ से बाहर निकले. बाहर आकर कुछ देर बैठकर सांस ली, पानी पिया और तब एहसास हुआ कि गर्मी और उमस ने शरीर को पूरी तरह थका दिया है. शर्ट पूरी तरह पसीने से भीग चुकी थी.

अब रात हो चुकी थी और भूख फिर से महसूस होने लगी थी. करीब आधे घंटे गाड़ी का इंतजार करने के बाद हम न्यू टाउन, कोलकाता की ओर निकले और रास्ते में एक रेस्टोरेंट पर रुक गए. खाने का ऑर्डर दिया ही था कि सामने दीवार पर लगे टीवी पर न्यूज चैनल चल रहा था और उसी पर कुछ देर पहले लिया गया हमारा इंटरव्यू प्रसारित हो रहा था.

जनता का मूड क्या है?

रेस्टोरेंट के कर्मचारी ने मुस्कुराते हुए पूछा, ‘भइया, आप टीवी में रिपोर्टर हैं क्या?’ मैंने भी मुस्कुराकर जवाब दिया, ‘जी हां, दिल्ली से चुनाव कवर करने आया हूं.’ खाना परोसते हुए उसी कर्मचारी जय बनर्जी से बातचीत शुरू हुई. मैंने उनसे पूछा, ‘आपको क्या लगता है, इस बार बदलाव होगा?’ उन्होंने बिना हिचक जवाब दिया, ‘हम बीजेपी समर्थक नहीं हैं, लेकिन अब बंगाल में ऐसी सरकार चाहिए जो सुरक्षा दे सके.’

उन्होंने अपनी जिंदगी की कहानी भी बताई कि कैसे वो पहले सूरत में काम करते थे और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण वापस बंगाल लौट आए. इसी दौरान रेस्टोरेंट के सामने से एक रैली निकली, जिसका नेतृत्व तेजस्वी यादव कर रहे थे, जो एक उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार के लिए आए थे. उन्हें देखकर जय बनर्जी ने कहा, ‘बिहार ने तो जंगलराज से मुक्ति पा ली, बंगाल की बारी कब आएगी?’

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करीब आधा घंटा रेस्टोरेंट में बिताने के बाद हम होटल के लिए रवाना हुए. लगभग एक घंटे बाद हम वापस अपने कमरे में थे. शरीर थका हुआ था, लेकिन दिमाग दिनभर के हर मंजर को दोबारा जी रहा था. ये सिर्फ एक दिन की रिपोर्टिंग नहीं थी. ये बंगाल की राजनीति, जनता की भावनाओं और जमीन की सच्चाई को बेहद करीब से महसूस करने का अनुभव था.

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