हर ऐप पर अलग पासवर्ड, TCS के आरोपी दानिश शेख के मोबाइल में लगा एडवांस सिक्योरिटी सिस्टम, डेटा एक्सेस करना हुआ मुश्किल – nashik tcs case danish sheikh forensic lab face id mobile unlock lclar


नासिक में TCS केस की जांच के दौरान एक बड़ा तकनीकी मोड़ सामने आया है, जहां आरोपी दानिश शेख के हाई सिक्योर मोबाइल ने पुलिस और फोरेंसिक टीम की जांच को काफी मुश्किल में डाल दिया था. मामला अब और आगे बढ़ते हुए आरोपी को सीधे फोरेंसिक साइंस लैब ले जाने तक पहुंच गया है. जानकारी के अनुसार, आरोपी दानिश शेख ने अपने मोबाइल में बेहद एडवांस सिक्योरिटी सिस्टम लगाया हुआ था. मोबाइल की हर एप्लीकेशन और हर फाइल के लिए अलग-अलग पासवर्ड सेट किए गए थे. इसके अलावा Face ID सिक्योरिटी भी लागू थी, जिससे बिना उसकी अनुमति के मोबाइल का डेटा एक्सेस करना लगभग नामुमकिन हो गया था.

पुलिस जांच में सामने आया कि मोबाइल में मौजूद डेटा केस से जुड़े कई अहम सबूतों को उजागर कर सकता है, लेकिन तकनीकी सुरक्षा इतनी मजबूत थी कि सामान्य तरीके से डेटा निकालना संभव नहीं हो पा रहा था. इसी कारण फोरेंसिक टीम को भी लगातार कठिनाई का सामना करना पड़ा. नासिक की रीजनल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में जब मोबाइल का तकनीकी विश्लेषण शुरू किया गया, तो विशेषज्ञों को भी डिवाइस को अनलॉक करने में समस्या आने लगी. हर बार पासवर्ड और फेस लॉक सिस्टम जांच को रोक देता था, जिससे जांच की प्रक्रिया धीमी पड़ गई.

हाई-सिक्योर मोबाइल बना पुलिस के लिए चुनौती

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कोर्ट में आवेदन किया और अनुमति मांगी कि आरोपी को स्वयं फोरेंसिक लैब लाया जाए ताकि फेस आईडी के माध्यम से मोबाइल अनलॉक किया जा सके. कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद आरोपी दानिश शेख को फोरेंसिक साइंस लैब ले जाया गया. फोरेंसिक टीम अब आरोपी के फेस आईडी का इस्तेमाल कर मोबाइल को अनलॉक करने की प्रक्रिया में जुटी हुई है. माना जा रहा है कि मोबाइल खुलते ही केस से जुड़े कई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत सामने आ सकते हैं, जो जांच की दिशा बदल सकते हैं.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल सबूत इस केस में बेहद अहम भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि मोबाइल में मौजूद डेटा से कई कड़ियों को जोड़ने में मदद मिल सकती है. हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मोबाइल से कौन-कौन सी जानकारी सामने आएगी. इस पूरी प्रक्रिया ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अत्यधिक सिक्योरिटी सिस्टम वाले मोबाइल डिवाइस जांच एजेंसियों के लिए कितनी बड़ी चुनौती बन सकते हैं. Face ID और मल्टी-लेयर पासवर्ड सिस्टम ने जांच को तकनीकी रूप से जटिल बना दिया है.

अहम डिजिटल सबूत मिलने की आशंका

फिलहाल फोरेंसिक टीम की कोशिश है कि मोबाइल का पूरा डेटा सुरक्षित तरीके से एक्सेस किया जाए ताकि जांच को आगे बढ़ाया जा सके. पुलिस को उम्मीद है कि आने वाले समय में इस मोबाइल से केस से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं. नासिक TCS केस अब सिर्फ एक सामान्य जांच नहीं रह गया है, बल्कि यह डिजिटल फोरेंसिक और हाई टेक सिक्योरिटी सिस्टम के बीच एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रहा है.

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रिपोर्ट- प्रवीण ठाकरे

नासिक TCS केस



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