ग्राउंड रिपोर्ट: सड़कों से लेकर गलियों तक, कोलकाता में मुस्लिम वोटर के मूड की पड़ताल – kolkata muslim voters ground report identity security election mood tmc vs bjp mamata ntc agkp iwth


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में कोलकाता की वोटिंग सबकी नजरों में है. इस शहर की आबादी का करीब पांचवां हिस्सा यानी लगभग 20 फीसदी मुस्लिम समुदाय है. आजतक की टीम कोलकाता के मुस्लिम बहुल इलाकों में गई और वहां के लोगों से बात की. इस ग्राउंड रिपोर्ट में समझेंगे कि कैसे इस समुदाय के लिए ये चुनाव सिर्फ वोट देने का मामला नहीं बल्कि अपनी सुरक्षा, पहचान और जिंदगी से जुड़ा सवाल है.

युवा वोटरों से बात करने पर उनकी चिंताएं ज्यादा सीधी और साफ थीं. एक युवा वोटर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ नाटक करते हैं और सांप्रदायिक राजनीति खेलते हैं. वहीं एक और युवा ने कहा कि दीदी यानी ममता बनर्जी वापस आएंगी और वो बहुत खुश हैं.

लेकिन कुछ नौजवानों का ध्यान रोजगार और कारोबार पर था. एक युवा इत्र व्यापारी ने कहा कि उनका काम मंदा है, खरीदार कम हो गए हैं क्योंकि लोगों की जेब में पैसे नहीं हैं. वो चाहते हैं कि सरकार एक मजबूत आर्थिक ढांचा दे.

राजनेताओं पर निराशा भी दिखी. एक दुकानदार ने कहा कि नेता उनके द्वारा बेचे जाने वाले धूप के चश्मों जैसे हैं, कई लेंस और कई चेहरे. एक युवा ने राघव चड्ढा का उदाहरण देते हुए कहा कि नेता पार्टी बदलते रहते हैं और इससे लोगों का भरोसा टूटा है.

आंकड़े क्या कहते हैं?

2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में कुल 42 मुस्लिम विधायक चुने गए थे. इनमें से 41 TMC से थे. इस बार 2026 में TMC ने 46 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं. वहीं BJP ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं दिया है. इन आंकड़ों से साफ होता है कि मुस्लिम समुदाय का झुकाव TMC की तरफ है और BJP से वो दूरी बनाए हुए है.

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कोलकाता में मुस्लिम समुदाय कहां बसता है और कितना अहम है?

कोलकाता एक ऐसा शहर है जहां सदियों से अलग-अलग धर्म और संस्कृतियां मिलकर रहती आई हैं. यहां के मेटियाब्रुज, पार्क सर्कस, राजाबाजार जैसे इलाकों में मुस्लिम आबादी घनी है. नखोदा मस्जिद के पास रबींद्र सरणी जैसे इलाकों में जाकर बात करने पर एक बात बार-बार सामने आई, लोगों के लिए शांति, सौहार्द और सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है.

कोलकाता के कुछ इलाकों जैसे बंदरगाह क्षेत्र और बलीगंज के कुछ हिस्सों में मुस्लिम आबादी 50 फीसदी से भी ज्यादा है. यानी इन इलाकों में ये समुदाय चुनाव के नतीजे तय करने में बेहद अहम भूमिका निभाता है.

वाजिद अली शाह की विरासत और SIR का डर

मेटियाब्रुज और राजाबाजार जैसे इलाके सिर्फ घनी आबादी वाले मोहल्ले नहीं हैं, इनका एक गहरा ऐतिहासिक महत्व है. अवध के आखिरी नवाब वाजिद अली शाह ने कोलकाता में अपनी जिंदगी के आखिरी साल गुजारे थे. उनके आने के बाद यहां कत्थक नृत्य, उर्दू शायरी और संगीत का एक खूबसूरत दौर आया जो आज भी जिंदा है.

वाजिद अली शाह के एक वंशज ‘शहंशाह मिर्जा’ ने बताया कि यहां आज भी बहुत से उर्दू बोलने वाले मुस्लिम हैं जो उस विरासत को सहेजे हुए हैं. लेकिन उन्होंने एक बड़ी बात कही कि SIR यानी स्पेशल इंटेंशिव रिविजन की वजह से लोगों में डर है. इस प्रक्रिया में कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए. जिनके नाम बचे हैं वो महसूस कर रहे हैं कि इस बार वोट देना बेहद जरूरी है, किसी भी कीमत पर.

कोलकाता की बिरयानी और सियासत का रिश्ता

कोलकाता की बिरयानी में आलू डाला जाता है जो इसे बाकी जगहों की बिरयानी से अलग बनाता है. ये परंपरा भी वाजिद अली शाह के जमाने से चली आ रही है. करीब 90 साल पुराने रेस्तरां अमीनिया के डायरेक्टर असर अहमद ने बताया कि उस दौर में जब मास की कमी होती थी तो आलू मिलाया जाने लगा और ये परंपरा बन गई.

लेकिन इस चुनाव में बिरयानी और मच्छी-भात यानी मछली-चावल तक राजनीतिक बहस में आ गए. जम जम ढाबे के बाहर एक शख्स ने नाराजगी जताते हुए कहा कि असली मुद्दों पर बात होनी चाहिए, खाने पर नहीं. लेकिन फिर जोड़ा कि दीदी वापस आएंगी.

महिलाएं क्या सोचती हैं?

महिला वोटर आमतौर पर कैमरे पर कम बोलती हैं लेकिन इस बार उनकी राय बेहद साफ थी. लगभग सभी ने ममता बनर्जी का समर्थन किया. एक महिला ने कहा कि वो दीदी को वोट देंगी. दूसरी ने कहा कि अगर BJP आई तो बंगाल बर्बाद हो जाएगा और टूट जाएगा. तीसरी ने कहा कि वो बाहर निकलती हैं तो सुरक्षित महसूस करती हैं और सरकारी योजनाओं का फायदा भी मिल रहा है. एक और महिला ने BJP पर सीधे तौर पर बांटने वाली राजनीति का आरोप लगाया.

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तो आखिरकार इस समुदाय का रुझान किस तरफ है?

कोलकाता में चुनाव मुख्य रूप से TMC और BJP के बीच है. मुस्लिम समुदाय साफ तौर पर BJP के खिलाफ एकजुट दिखा. उनके लिए ये चुनाव सिर्फ अच्छी सरकार चुनने का मामला नहीं है बल्कि उनकी सुरक्षा, उनकी पहचान और अपनेपन की भावना को बचाने का सवाल है. और एक कड़े मुकाबले में ये वोट नतीजा तय कर सकते हैं.

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