राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी छोड़ने और भाजपा में शामिल होने के बाद उनके खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. रविवार को मुंबई में उनके आवास के बाहर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया. पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कई आम आदमी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया. कार्यकर्ताओं के हाथों में प्ले कार्ड था जिनपर लिखा था राघव चड्ढा गद्दार है.

पार्टी कार्यकर्ता इसे ‘विश्वासघात’ बताते हुए विरोध दर्ज कराना चाहते थे. प्रदर्शन मुंबई के खार इलाके में राघव चड्ढा के आवास के बाहर हो रहा था. सभी कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए, जिसके बाद पुलिस से झड़प हुई और बाद में सभी को हिरासत में ले लिया गया.

स्थिति को देखते हुए पुलिस ने इलाके की सड़कों को दोनों तरफ से बंद कर दिया. वाहनों की आवाजाही रोक दी गई और किसी भी तरह की भीड़ जुटने से पहले ही कड़ी निगरानी शुरू कर दी गई. पुलिस की इस कार्रवाई के कारण कार्यकर्ता निर्धारित स्थान तक पहुंच ही नहीं सके.

हरभजन सिंह के घर के बाहर भी हुआ था प्रदर्शन
शनिवार को पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह के घर के बाहर काले रंग से ‘पंजाब का गद्दार’ लिखे जाने की घटना सामने आई थी. आम आदमी पार्टी के समर्थकों ने काली पट्टी बांधकर अपना रोष जताया था. हरभजन सिंह के घर के बाहर हुई घटना का वीडियो भी सामने आया है. इसमें कुछ लोग स्प्रे पेंट से दीवार पर ‘गद्दार’ लिखते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में पुलिसकर्मी भी मौजूद नजर आते हैं, लेकिन उन्हें रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही.

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर कड़ा प्रहार किया. चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इन सांसदों ने सिर्फ पार्टी का नहीं, बल्कि पंजाब की जनता के भरोसे का भी अपमान किया है. उनके मुताबिक, यह कदम सीधे तौर पर विश्वासघात की श्रेणी में आता है.

मुख्यमंत्री ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में मजबूत जनाधार न होने के कारण वह दूसरी पार्टियों के नेताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है. उन्होंने दावा किया कि भाजपा डर, दबाव और प्रलोभन जैसी रणनीतियों के जरिए आम आदमी पार्टी को कमजोर करना चाहती है.
भगवंत मान ने यह भी कहा कि पंजाब में बेअदबी के मामलों को लेकर सख्त कानून लागू होने के बाद भाजपा की बेचैनी बढ़ी है. उनके अनुसार, यही वजह है कि राज्य की राजनीति में अस्थिरता पैदा करने की कोशिशें तेज हो गई हैं.

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