इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में इन दिनों एक अनोखी समस्या लगातार सामने आ रही है. मैदान पर खिलाड़ियों की फुर्ती और फिटनेस के बावजूद ‘कैच-ड्रॉप’ का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. हालात ऐसे हैं कि लगभग हर मैच में छूटे कैच सीधे नतीजे को प्रभावित कर रहे हैं.

अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए दिल्ली कैपिटल्स और पंजाब किंग्स के मुकाबले की बात करें. इस मैच में दिल्ली ने 264 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसमें केएल राहुल की 152 रनों की पारी निर्णायक साबित हुई. राहुल को तीसरे ओवर में ही जीवनदान मिल गया था, जब शशांक सिंह ने आसान कैच टपका दिया.

इसके बाद मानो कैच छूटने का सिलसिला थमने का नाम नहीं लिया. दिल्ली की पारी के दौरान पंजाब के फील्डरों ने कई मौके गंवाए, जबकि जवाब में दिल्ली ने भी कुल छह कैच छोड़ दिए. 15वें ओवर में श्रेयस अय्यर को करुण नायर ने जीवनदान दिया, जिसका फायदा उठाते हुए अय्यर ने टीम को रिकॉर्ड रन-चेज दिला दी.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या नई नहीं है. आंकड़ों के अनुसार, 2020 में IPL में हर 100 में से 85 कैच पकड़े जा रहे थे, जो 2025 तक घटकर 76 रह गए. मौजूदा सीजन में इसमें और गिरावट की आशंका जताई जा रही है.

सिर्फ एक मैच ही नहीं, 25 अप्रैल को खेले गए मुकाबलों में कुल 17 कैच छूटे. जयपुर में राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मुकाबले में भी कई आसान मौके गंवाए गए, जिसके चलते 229 रनों का लक्ष्य सहजता से हासिल कर लिया गया.

पूर्व खिलाड़ी श्रीवत्स गोस्वामी ने इसे ‘गेम अवेयरनेस’ की कमी से जोड़ते हुए कहा कि खिलाड़ी कई बार मैदान पर पूरी तरह सतर्क नहीं रहते. हालांकि कुछ मामलों में थकान भी बड़ी वजह बनकर उभर रही है. उदाहरण के तौर पर, वॉशिंगटन सुंदर ने शॉर्ट मिड-विकेट पर विराट कोहली का आसान कैच छोड़ा, जिसके बाद कोहली ने 81 रन बनाकर मैच खत्म कर दिया.

लगातार व्यस्त क्रिकेट कैलेंडर भी इस गिरावट की बड़ी वजह माना जा रहा है. ICC टूर्नामेंट, फ्रेंचाइजी लीग और द्विपक्षीय सीरीज के बीच खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा. IPL 2026 से पहले भी खिलाड़ी हाल ही में टी20 विश्व कप खेलकर आए हैं, जिससे शारीरिक और मानसिक थकान बढ़ी है.

भारत के पूर्व फील्डर मोहम्मद कैफ ने स्पष्ट कहा है कि फील्डिंग में सुधार के लिए नियमित अभ्यास जरूरी है, लेकिन मौजूदा शेड्यूल में खिलाड़ियों को इसके लिए समय नहीं मिल पाता.

इसके अलावा, देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी भी खिलाड़ियों की एकाग्रता और फिटनेस पर असर डाल रही है. ऊंचे शॉट को ट्रैक करना मुश्किल हो रहा है, जबकि डिहाइड्रेशन और थकान के कारण फील्डिंग में चूक बढ़ रही है.

स्पष्ट है कि ‘कैच-ड्रॉप’ की यह समस्या सिर्फ व्यक्तिगत गलती नहीं, बल्कि व्यस्त शेड्यूल, थकान और परिस्थितियों का संयुक्त प्रभाव है. IPL जैसे लंबे और दबावपूर्ण टूर्नामेंट में अब यह ट्रेंड बनता जा रहा है, जहां आसान दिखने वाले मौके ही मैच का रुख तय कर रहे हैं.

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