बिहार के मुजफ्फरपुर में साइबर ठगी का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 67 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. इस गैंग का मास्टरमाइंड बिहार सरकार का एक रिटायर्ड सांख्यिकी अधिकारी निकला, जिसे उसके बेटे के साथ गिरफ्तार किया गया है.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 60 साल के प्रियरंजन शर्मा और उसके पुत्र अनंत अमीष के रूप में हुई है. मुजफ्फरपुर पुलिस ने पटना के राजीव नगर स्थित उनके घर पर छापेमारी कर दोनों को दबोचा. मौके से नकदी, लैपटॉप, मोबाइल फोन, कई बैंक पासबुक, चेकबुक और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं.

12 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’

जांच में सामने आया है, कि आरोपी खुद को सीबीआई, पुलिस और टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाते थे. हालिया मामले में काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के एक रिटायर्ड बैंक कर्मी को 12 दिनों तक कॉल कर डराया गया. आरोपियों ने झांसा दिया कि उसके आधार कार्ड का इस्तेमाल आतंकी गतिविधि में हुआ है. गिरफ्तारी के डर से पीड़ित ने 67 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए थे.

पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. आरोपियों के बैंक खातों में करीब 200 करोड़ रुपये तक के संदिग्ध लेनदेन के संकेत मिले हैं. गिरोह फर्जी कंपनियों और एनजीओ के नाम पर खाते खोलकर ठगी की रकम को कई लेयर में घुमाता था, ताकि ट्रैकिंग से बच सके.

एक साल से एक्टिव था गिरोह

साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार के अनुसार, यह गिरोह पिछले एक साल से सक्रिय था और देश के 28 राज्यों में इसके खिलाफ शिकायतें दर्ज हैं. मुंबई क्राइम ब्रांच समेत कई जगहों पर इनके खिलाफ केस दर्ज हैं. बताया जा रहा है कि यह गैंग एक दिन में करीब 4 करोड़ रुपये तक का ट्रांजेक्शन करता था.

बता दें स्पेशल टीम ने 9 अप्रैल को दर्ज एफआईआर के बाद एसएसपी के निर्देश पर विशेष टीम गठित की थी. टीम ने कॉल डिटेल, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन का विश्लेषण कर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की और उनको पटना से गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है.

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