पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता के बीच भारत ने भी अपनी चाल तेज कर दी है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ऐसे देश पहुंचे हैं, जिसने हाल ही में पाकिस्तान को ऐसा दर्द दिया था, जिससे बचने के लिए उसे कटोरा लेकर कई रास्ते ताकने पड़े. पिछले दिनों यूएई ने पाकिस्तान को कर्ज चुकाने की याद दिलाकर झटका दिया था. यूएई के तगादे से परेशान होकर पाकिस्तान को संयुक्त अरब अमीरात का UAE को 3.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना था. अगर पाकिस्तान ऐसा करता तो उसका विदेशी मुद्रा भंडार भी जीरो हो जाता. ऐसे में उसे सऊदी के ‘चिल्लर’ की मदद लेनी पड़ी थी.

इसके बाद, पाकिस्तान को सऊदी अरब से 1 अरब डॉलर की आर्थिक मदद भी मिली, जो उसकी कमजोर होती अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए अहम मानी जा रही है. अजित डोभाल कुछ दिन पहले सऊदी अरब भी होकर आए हैं.

शनिवार को अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान और अजित डोभाल ने की मुलाक़ात सऊदी अरब की उनकी यात्रा के ठीक एक हफ़्ते बाद हुई है. एनएसए डोभाल की इन यात्राओं को पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच, खाड़ी देशों के साथ दिल्ली के हाई-लेवल रिश्ते से जुड़े कैंपेन का एक हिस्सा माना जा रहा है. पिछले दो महीनों में ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ के बंद होने की वजह से एनर्जी-रिच देश UAE के साथ होने वाला व्यापार बाधित हुआ है. इस दौरान, इस स्ट्रेट से सिर्फ 10 भारतीय जहाज़ ही गुज़र पाए हैं.

राष्ट्रपति शेख मोहम्मद डोभाल की क्या बात हुई?

मीटिंग के दौरान, दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच बड़ी रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने और बदलते क्षेत्रीय हालात के बीच एनर्जी सिक्योरिटी पर सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की. यूएई में भारतीय दूतावास के मुताबिक, डोभाल ने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद के साथ अपनी मीटिंग के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से शुभकामनाएं दीं और साथ ही द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने के उपायों, क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और आपसी हित के अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की.

भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “उन्होंने (डोभाल) राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान से मुलाक़ात की. PM नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं दीं. रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के उपायों, क्षेत्रीय स्थिति और आपसी हित के अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई.”

यूएई की सरकारी न्यूज एजेंसी WAM ने मीटिंग के बारे में आगे बताया कि शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद ने डोभाल का इस्तकबाल किया, जिसके बाद दोनों देशों के नेतृत्व के बीच शुभकामनाओं का आदान-प्रदान हुआ.

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चर्चा के दौरान पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों और क्षेत्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा व स्थिरता पर उनके प्रभावों के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर भी ध्यान केंद्रित किया गया. इस मीटिंग में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सुप्रीम काउंसिल के महासचिव अली बिन हम्माद अल शम्सी भी शामिल हुए. यह एक महीने के अंदर दोनों देशों के बीच दूसरी हाई-लेवल मीटिंग है.

पिछले दो महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के नेताओं से करीब दो बार बात की है. वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी इन देशों के अपने समकक्षों के साथ लगातार संपर्क में रहे हैं. इसी महीने, एस. जयशंकर ने अपनी दो-राष्ट्रों की यात्रा के दौरान यूएई के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी. विदेश मंत्री ने भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी की मज़बूती का ज़िक्र करते हुए कहा कि जटिल क्षेत्रीय माहौल के बावजूद दोनों देशों के बीच चल रहा संवाद मज़बूत और पारदर्शी बना हुआ है.

अजित डोभाल की यह यात्रा एक अहम कूटनीतिक पहल है, क्योंकि वे सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर अमीराती प्रशासन के साथ कोऑर्डिनेश बनाने पर काम कर रहे हैं.

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