भारतीय नौसेना ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सक्रिय रूप से तैनात रहने के बाद भी युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है. उत्तरी अरब सागर में ब्रिटेन की रॉयल नेवी के साथ बड़े पैमाने पर युद्ध अभ्यास से लेकर आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने तक, भारतीय नौसेना तेजी से आगे बढ़ रही है.

विमानवाहक पोतों से लेकर युद्धपोतों, पनडुब्बियों से लेकर पनडुब्बी-रोधी टॉरपीडो तक, नौसेना स्वदेशी मंचों और हथियारों को अपने शस्त्रागार में शामिल करने पर केंद्रित है. हाल ही में नौसेना में शामिल किया गया नया हथियार है कानपुर में बने एंटी-एयरक्राफ्ट गन बैरल.

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स्वदेशी SRGM गन बैरल का निर्माण

नौसेना के युद्धपोतों का मुख्य हथियार है SRGM यानी सुपर रैपिड गन माउंट. अब इस गन का बैरल उत्तर प्रदेश के कानपुर में ही बनाया जा रहा है. कानपुर के फील्ड गन फैक्ट्री में इस गन का बैरल तैयार किया गया है. फील्ड गन फैक्ट्री, कानपुर ने दो SRGM बैरल भारतीय नौसेना को सौंप दिए हैं.

SRGM गन बैरल असेंबली का स्वदेशी उत्पादन देश की विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता को कम करता है. अब तक इस गन का लाइसेंस उत्पादन हरिद्वार में भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) में हो रहा था. भारत ने यह गन इटली की कंपनी ओटो मेलारा से खरीदी थी. वर्तमान में यह गन भारतीय नौसेना के लगभग सभी युद्धपोतों पर लगी हुई है.

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भारतीय नौसेना srgm कानपुर

पहली बार स्वदेशी बैरल का निर्माण

यह पहली बार है जब SRGM के बैरल स्वदेशी रूप से बनाए गए हैं। नौसेना को स्वदेशी बैरल की पहली खेप सौंपना एक बड़ा कदम है, क्योंकि अब सभी युद्धपोतों पर मौजूद बैरल धीरे-धीरे स्वदेशी SRGM बैरल से बदले जाएंगे। अब से इस गन का बैरल विदेश से नहीं मंगाया जाएगा। जिन युद्धपोतों पर यह सुपर रैपिड गन माउंट लगी है, उनके बैरल इन स्वदेशी बैरल से बदले जाएंगे। आने वाले दिनों में नौसेना में शामिल होने वाले सभी नए युद्धपोतों में भी यही स्वदेशी बैरल होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, 12 इंजीनियरों की एक टीम ने 3 साल तक इस बैरल को तैयार करने में काम किया। चूंकि यह बैरल अब भारत में बन रहा है, इसलिए इसकी लागत भी पहले से कम होगी.

SRGM की ताकत

सुपर रैपिड गन माउंट की ताकत की बात करें तो इसकी गति के सामने फाइटर जेट की रफ्तार भी फीकी पड़ जाएगी. यह गन एक मिनट में 120 राउंड फायर कर सकती है. इस गन के बैरल की लंबाई 4588 मिलीमीटर है, जिससे 76 मिलीमीटर के गोले दागे जाते हैं. यह 15 किलोमीटर दूर से दुश्मन के फाइटर जेट को निशाना बना सकती है.

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यह मध्यम कैलिबर की एंटी-मिसाइल और एंटी-एयरक्राफ्ट गन है, जिसमें आग की अनूठी दर और सटीकता है. इस हथियार की खासियत है कि यह एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बना सकता है. यह तेजी से चलने वाले जहाजों और मिसाइलों के खिलाफ सबसे प्रभावी है. 2023 में ही रक्षा मंत्रालय ने हरिद्वार के भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के साथ 16 अपग्रेडेड गनों का सौदा किया था. इस पूरे सौदे की कीमत 2956.89 करोड़ रुपये थी.



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