नीत सफलता की कहानी अविका अग्रवाल: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट यूजी का रिजल्ट जारी कर दिया है. राजस्थान के महेश कुमार ने ऑल इंडिया रैंक (AIR)-1 हासिल की है. मध्य प्रदेश के उत्कर्ष अवधिया ने दूसरी और महाराष्ट्र के कृषांग जोशी ने ऑल इंडिया रैंक 3 हासिल की है. वहीं दिल्ली की अविका अग्रवाल ने नीट यूजी में 5वीं रैंक प्राप्त की है, वे टॉप 10 में जगह बनाने वाली अकेली लड़की हैं.
टॉप 10 में जगह बनाने वाली अकेली हैं अविका अग्रवाल
अविका अग्रवाल, दिल्ली (एनसीटी) की रहने वाली हैं, जिन्होंने नीट यूजी 2025 में 99.9996832 परसेंटाइल यानी 720 में से 680 अंक हासिल किए हैं और 5वीं रैंक हासिल की है. उनकी इस उपलब्धि ने साबित किया कि कड़ी मेहनत, समय प्रबंधन, और सही मार्गदर्शन के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है. अविका भविष्य में डर्मेटोलॉजी या न्यूरोसर्जरी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करना चाहती हैं. उनकी सफलता की कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो नीट जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं.
डॉक्टर वाली फैमिली
अविका के माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं. अविका की सफलता में पिता डॉ. अशुतोष अग्रवाल और मां डॉ. नेहा अग्रवाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा. अविका ने बताया कि जब वह डिमोटिवेट होती थीं, तो उनके माता-पिता ने उन्हें प्रेरित किया और सकारात्मक माहौल प्रदान किया. उनके पिता, डॉ. अशुतोष अग्रवाल, ने कहा, “माता-पिता को बच्चों के साथ शामिल होना चाहिए. कई बार माता-पिता को यह भी नहीं पता कि बच्चे के विषय में कितने चैप्टर हैं. अगर आप उनके साथ बैठकर उनकी समस्याओं को समझें और उनका साथ दें, तो बच्चा निश्चित रूप से अपने लक्ष्य से आगे बढ़ेगा.”
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पेरेंट्स और टीचर्स ने कैसे मोटिवेट किया?
अविका ने कहा कि नीट यूजी की तैयारी के लिए मेरे पेरेंट्स और कोचिंग से काफी सपोर्ट मिला. बच्चे दिमाग में बहुत सारी चीजें चलती रहती हैं कि क्या होगा, कैसे होगा, कुछ गलत तो नहीं हो जाएगा, क्या मैं कुछ गलत तो नहीं कर रहा उन मोमेंट्स पर पेरेंट्स ने खुद ही मुझे उन चीजों का पहचाना और उनसे निकलने में मदद की. उसी तरह जब टेस्ट रिजल्ट्स को को लेकर मैं डिमोटिवेट होती थी टीचर्स मदद करते थे और वापस ट्रैक पर आने में मदद करते थे.
10वीं क्लास से टॉपर रही हैं अविका
अविका की मां, डॉ. नेहा अग्रवाल, ने बताया कि अविका ने कभी अपनी सफलता को हावी नहीं होने दिया. दसवीं कक्षा से ही वह टॉपर रही, लेकिन उसने हमेशा मेहनत और अनुशासन को प्राथमिकता दी. माता-पिता ने अविका को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि वह जरूरत पड़ने पर आराम करे. अविका के भाई ने भी उनके तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
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सोशल मीडिया से बनाई दूरी, इतने घंटे की पढ़ाई
उनकी मां, डॉ. नेहा अग्रवाल, ने बताया कि अविका शुरू से ही मेहनती रही हैं और 10-12 घंटे बिना किसी डिस्ट्रैक्शन के पढ़ाई करती थीं. वह क्लास में पढ़ाए गए टॉपिक्स को उसी दिन रिवाइज करती थीं और संबंधित प्रश्नों का अभ्यास करती थीं. अविका का मानना है कि सिली मिस्टेक्स से बचने के लिए नियमित प्रैक्टिस और टेस्ट सीरीज बहुत जरूरी हैं. उन्होंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाकर डिस्ट्रैक्शन्स को कम किया.
छोटे-छोटे टारगेट बनाकर की नीट की तैयारी
अविका ने अपनी पढ़ाई को छोटे-छोटे लक्ष्यों में बांटकर तैयारी की. उन्होंने रोजाना 6-8 घंटे पढ़ाई की, जिसमें डेढ़ घंटे के अध्ययन सत्र और आधे घंटे के ब्रेक शामिल थे. यह रणनीति उन्हें थकान से बचाने और फोकस बनाए रखने में मददगार रही. अविका ने बताया कि वह मॉर्निंग क्लासेस से घर आने के बाद वे 1-1.5 घंटे का ब्रेक लेकर पढ़ती थीं, जिससे माइंड फ्रेश रही और पढ़ाई बोझ न लगे.
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नीट एस्पिरेंट्स के लिए टॉपर ने दिए जरूरी टिप्स
अविका ने नीट यूजी की तैयारी कर रहे अन्य छात्रों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सलाह दीं-
अपना उद्देश्य पहचानें: अविका का मानना है कि हर व्यक्ति का समय आता है जब वह अपने जीवन का उद्देश्य समझता है. “जब आपको यह समझ आ जाए कि आप अपने जीवन में क्या करना चाहते हैं, तो प्रेरणा अपने आप आती है.”
टाइम मैनेजमेंट: पढ़ाई के लिए समय का सही प्रबंधन जरूरी है. छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं और उन्हें पूरा करें.
डिस्ट्रैक्शन्स से बचें: सोशल मीडिया और अन्य व्याकुलताओं से दूरी बनाना सफलता की कुंजी है. अविका ने पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाई.
रेगुलर प्रैक्टिस करें: क्लास में पढ़ाए गए टॉपिक्स को उसी दिन रिवाइज करें और प्रश्नों का अभ्यास करें. इससे गलतियां कम होती हैं.
मानसिक स्वास्थ्य: तनाव और अकेलेपन से बचने के लिए परिवार और शिक्षकों से खुलकर बात करें.
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पेरेंट्स के लिए अविका और उनके माता-पिता की सलाह
अविका और उनके माता-पिता ने माता-पिता की भूमिका पर जोर दिया. अविका ने कहा कि बच्चों को अकेलापन महसूस होता है जब माता-पिता उनके पास समय नहीं देते. “माता-पिता को बच्चों की समस्याओं को समझना चाहिए और उनके साथ समय बिताना चाहिए.” उनके पिता ने सुझाव दिया कि माता-पिता को बच्चों के विषयों और उनकी पढ़ाई की प्रगति के बारे में जानकारी होनी चाहिए. उनकी मां ने जोर दिया कि बच्चों को प्रैक्टिस पर ध्यान देना चाहिए ताकि छोटी-छोटी गलतियों से बचा जा सके.

