ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष का असर उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले पर भी नजर आने लगा है. जिले के करीब 300 छात्र और धर्मगुरु ईरान में फंसे हुए हैं, जिनकी सुरक्षित वापसी को लेकर परिजन बेहद चिंतित और बेचैन हैं. दरअसल, बकरीद के बाद मोहर्रम में शामिल होने के लिए ये सभी भारत लौटने की तैयारी में थे, लेकिन युद्ध के हालात और एयरबेस बंद होने की वजह से अब फ्लाइट्स पूरी तरह रद्द कर दी गई हैं.

सायरनों और मिसाइलों के बीच दहशत
ईरान के कई शहरों में मिसाइल हमलों और सायरनों की गूंज से हालात भयावह बने हुए हैं. ऐसे में कौशांबी जिले के जिन गांवों के छात्र और धार्मिक शिक्षक वहां हैं, उनके परिजन लगातार सरकार और विदेश मंत्रालय से मदद की अपील कर रहे हैं.

वैकल्पिक रास्तों की तलाश
सूत्रों के मुताबिक, फंसे हुए लोग अब ईराक, अफगानिस्तान, लेबनान या सीरिया के रास्ते भारत लौटने की कोशिश कर सकते हैं. इसको लेकर कई स्तर पर बातचीत चल रही है, लेकिन युद्ध के कारण हर रास्ता जोखिम भरा है.

परिजनों की हालत बेहाल
रामपुर सुहेला, मझियांवा, अड़हरा, लहना, अमुरा, मंझनपुर, सरैंया, अगियौना, बाजापुर, फैजीपुर, मनौरी, पूरामुफ्ती, सैयदसरांवा, दारानगर, कड़ा, मुंगहरी और निंदूरा जैसे गांवों के लोग इस समय गहरे संकट में हैं. हर घर में बस दुआएं की जा रही हैं कि हालात जल्द सुधरें और उनके अपने सलामत वतन लौटें.

विदेश मंत्रालय की अगली कार्रवाई पर निगाहें
मोहम्मद जैगम ने कहा कि इस बार मुहर्रम उनके बिना ही मनाया जाएगा, जिससे गांवों में मायूसी का माहौल है. अब सबकी निगाहें भारत के विदेश मंत्रालय पर टिकी हैं कि वह जल्द कोई ठोस कदम उठाकर इन फंसे हुए लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करे.



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