इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज शेखर यादव के खिलाफ विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव संसद के प्रक्रियात्मक नियम के तहत अटका हुआ है.

दरअसल, हाई कोर्ट के जज शेखर यादव के खिलाफ कथित विवादित बयान के मामले में विपक्ष द्वारा महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, जो इस समय उपराष्ट्रपति के पास लंबित है, लेकिन यह प्रक्रिया तकनीकी अड़चनों में फंस गई है.

राज्यसभा सचिवालय ने तय प्रोटोकॉल के अनुसार प्रस्ताव के साथ जमा 55 हस्ताक्षरों की विस्तृत जांच शुरू की है. यह जांच तब शुरू हुई जब एक सदस्य के हस्ताक्षर दो बार दर्ज होने की शिकायत मिली. संबंधित सांसद ने दो बार हस्ताक्षर करने से इनकार किया है.

सरकारी प्रक्रिया के अनुसार, सभी हस्ताक्षरों का एक विशेष प्रारूप में सत्यापन जरूरी है. अब तक लगभग 19-21 सांसदों के हस्ताक्षरों का सत्यापन अभी बाकी है.

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सूत्रों के अनुसार, जब तक सभी हस्ताक्षर पूरी तरह सत्यापित नहीं हो जाते, तब तक प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता. अगर किसी प्रकार की गड़बड़ी- जैसे एक सांसद के दो बार या प्रस्ताव के प्रारूप में कोई गलती पाई जाती है तो यह प्रस्ताव तकनीकी आधार पर खारिज भी किया जा सकता है.

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