क्लस्टर बम: इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान खतरनाक हथियारों की ओर खींचा है. इस बार आरोपों की जद में आया है क्लस्टर बम. इजरायल ने दावा किया है कि 19 जून 2025 को ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों में से एक में क्लस्टर बम वाला वॉरहेड था. अगर यह दावा सही साबित होता है तो यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन होगा. ऐसे में जानें क्या है क्लस्टर बम और ये कितना खतरनाक होता है.
क्या होता है क्लस्टर बम?
क्लस्टर बम एक ऐसा विस्फोटक हथियार है जिसमें दर्जनों से लेकर सैकड़ों तक छोटे बम होते हैं. इसे जब दागा जाता है तो ये हवा में फैलकर एक बड़े इलाके को निशाना बनाते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन की सेना की टुकड़ियों या वाहनों को एकसाथ नष्ट करना होता है.
इसके विस्फोट से तबाही तो सीमित क्षेत्र में होती है, लेकिन छोटे-छोटे बम जमीन पर बिखर जाते हैं और कई बार तुरंत न फटकर बाद में विस्फोट करते हैं, जिससे आम नागरिक भी बड़ी संख्या में प्रभावित होते हैं.
परमाणु बम से कितनी है तुलना?
परमाणु बम एक पूरे शहर को तबाह कर सकता है, जबकि क्लस्टर बम 1-2 किमी क्षेत्र में सैकड़ों विस्फोट कर सकता है. हालांकि तबाही की तीव्रता में क्लस्टर बम पीछे हैं, लेकिन प्रभाव के दायरे में यह खतरनाक साबित होते हैं, खासकर जब वे बाद में फटते हैं.
क्यों लगा प्रतिबंध?
साल 2008 में डबलिन कन्वेंशन के तहत क्लस्टर बमों के उत्पादन, उपयोग और बिक्री पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लगाया गया. अब तक 108 देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन भारत, अमेरिका, चीन, रूस, पाकिस्तान और इजरायल जैसे देशों ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. रेड क्रॉस के अनुसार, करीब 75 देशों के पास अब भी किसी न किसी रूप में क्लस्टर बम मौजूद हैं.
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