Exclusive: ईरान-इजरायल जंग में यरुशलम पर नहीं हुआ कोई हमला… 12 दिन बाद देखें अब कैसे हैं हालात – Israel Iran War Ceasefire No Missile Attacks In Jerusalem School Market Opens NTC


ईरान और इजरायल के बीच 12 दिन चले जबरदस्त संघर्ष के बाद, अब यरुशलम की फिजा में शांति और राहत का माहौल है. इस ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण शहर में, भले ही सीधे मिसाइल हमले नहीं हुए लेकिन आसमान में मिसाइलों की हलचल और गिरता मलबा यहां के लोगों को असहज जरूर कर गया.

आजतक की शिवानी शर्मा इस समय यरुशलम में मौजूद हैं. उन्होंने आम लोगों से बात की जिन्होंने बताया कि शहर में भले ही सीधे निशाना नहीं बनाया गया, लेकिन मिसाइलों का मलबा जमीन पर गिरा और लोग आसमान में मिसाइलें और उनके इंटरसेप्टर्स को साफ़ देख पा रहे थे.

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ईरान ने पहले साफ कर दिया था कि यरुशलम पर हमला नहीं करेंगे!

शिवानी शर्मा ने यरुशलम के निवासी केन से बातचीत की. केन ने बताया, “ईरानी सरकार ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह यरुशलम को निशाना नहीं बनाएंगे, क्योंकि यहां एक वर्ग किलोमीटर में यहूदी, ईसाई और इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र स्थल स्थित हैं. इसी क्षेत्र को होली बेसिन कहा जाता है जिसमें माउंट ऑफ ऑलिव्स, माउंट मोरियाह (जहां अल-अक्सा मस्जिद है) और माउंट सायन जैसे महत्वपूर्ण स्थल आते हैं.”

केन ने यह भी बताया कि इजरायल का भूगोल समझना जरूरी है, जो सिर्फ 50 किलोमीटर चौड़ा है. इसलिए ईरान से दागी गई मिसाइलें यरुशलम के ऊपर से होकर गुजरीं. कई बार उनके मलबे यरुशलम में गिरे, एक मलबा तो खुद केन के पास कुछ मीटर की दूरी पर गिरा.

लोग यहां शांति चाहते हैं, ना कि युद्ध!

केन ने कहा, “यरुशलम का मतलब ही है – शांति और पूर्णता. लोग यहां शांति चाहते हैं, ना कि युद्ध. ये संघर्ष हमारे जैसे नागरिकों का नहीं, बल्कि उन ताकतों का है जो हज़ारों किलोमीटर दूर बैठकर यरुशलम को हथियार बना लेते हैं.”

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शिवानी शर्मा ने बताया कि अब यरुशलम की गलियों में चर्च की घंटियां गूंज रही हैं, मस्जिदों से अजान की आवाजें आ रही हैं और यहूदी प्रार्थनाएं भी हो रही हैं. यह विविधता ही इस शहर को खास बनाती है. कार्यक्रम के अंत में केन ने भारत के लिए स्नेह और शुभकामनाएं भेजते हुए कहा, “इजरायल भारत से गहरा प्रेम करता है, शालोम (शांति).”



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