ओशो उद्धरण: आध्यत्मिक गुरु ओशो और महान विचारक ओशो ने जीवन में रिश्तों, शत्रुता और ऊर्जा के संतुलन पर गहरी बात कही है. उनके अनुसार, जीवन में अगर किसी से दुश्मनी टालना संभव न हो, तो उनसे टकराना भी नहीं चाहिए. क्योंकि ऐसे लोगों से टकराना आत्मघाती साबित हो सकता है. इससे न केवल हमारा मानसिक संतुलन बिगड़ता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी रुक जाती है.
ओशो के अनुसार किन लोगों से दुश्मनी लेना होता है खतरनाक?
आत्मघाती है मूर्ख व्यक्ति से दुश्मनी मोल लेना
“मूर्ख से बहस करना ठीक वैसा ही है जैसे दीवार से टकराना.” ओशो मानते हैं कि मूर्ख व्यक्ति से दुश्मनी लेना अपनी उर्जा को बेकार में खर्च करना है. क्योंकि मूर्ख इंसान बिना तर्क के प्रतिक्रिया देता है और इससे कई बार हमें गंभीर नुकसान उठना पड़ता है.
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ईर्ष्यालु व्यक्ति से टकराना भी खतरनाक
ओशो ने कहा है कि ईर्ष्या से भरा इंसान आपकी सफलता को पचा नहीं सकता. ऐसा व्यक्ति आपको पीछे खींचने के लिए षड्यंत्र करेगा. साथ ही वह आपको सामाजिक रूप से बदनाम करने की कोशिश करता है.
टकराव में विश्वास करता है अहंकारी व्यक्ति
ओशो कहते हैं कि अहंकारी व्यक्ति हमेशा अपने ‘अहम’ को सही साबित करने में लगा रहता है. ऐसे व्यक्ति से पंगा लेना आपको भारी पड़ सकता है. क्योंकि यह किसी को भी मानसिक और भावनात्मक रूप से थका देता है. वह माफी मांगना या समझौता करना नहीं जानता.
नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति आपकी ऊर्जा को चूस लेता है
ओशो कहते हैं कि नकारात्मक इंसान चीज में आपकी कमी देखेगा है आपको नीचा दिखाने की कोशिश करेगा. इससे मन निराशा फैलाती है. ऐसे लोगों से दुश्मनी मोल लेना मतलब अपनी सकारात्मक उर्जा को गंवाना है. ओशो इसे ‘आत्मिक जहर’ कहते हैं.
स्वार्थी व्यक्ति सामने से नहीं, पीछे से वार करता है
ओशो मानते हैं कि स्वार्थी व्यक्ति अपनी सुविधा के लिए किसी को भी धोखा दे सकता है. ऐसे इंसान से दुश्मनी लेना खतरे से खेलने जैसा है, क्योंकि वह दोस्त बनकर आपकी पीठ में छुरा घोंप सकता है.
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पोस्ट भूल से भी इन लोगों से न लें पंगा, वरना चुकानी पड़ेगी भारी कीमत, जीवन भर होगा पछतावा पहले दिखाई दिया Prabhat Khabar।

