बच्चों की कल्पना

घर से स्कूल, फिर ट्यूशन, फिर कोई हॉबी क्लास….कहां गुम हो रहा बचपना? सोचना तो होगा – Overloaded lives of school kids in urban cities childhood missing expert says ntcpmm

महज 11 साल की रिया हर सुबह भोर के 6 बजे उठ जाती है. ब्रश करना, नहाना और 7 बजते-बजते कांधे पर स्कूल का भारी बैग लिए वो दौड़ पड़ती…

कल्पनाओं के रंगों से सजी ‘अभिधा’, जहां हर पेंटिंग बयां कर रही एक अनोखी कहानी, कैनवास पर बच्चों ने भरे कल्पनाओं के रंग

बिहार ललित कला अकादमी की दीवारें इन दिनों रंग-बिरंगी पेंटिंग्स से सजी हैं, जो कलाकारों की सोच, कल्पना और भावनाओं को सजीव बना रही हैं. चित्रकला प्रदर्शनी ‘अभिधा 2025’ में…