अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी है. उनके इस कदम से मिडिल-ईस्ट में एक बार फिर तनाव गहरा गया है. इस बीच यमन अब ईरान की मदद के लिए आगे आया है. ईरान के लिए यमन लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाले समुद्री रास्ते को बंद कर सकता है.
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप थिंक-टैंक में यमन मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक अहमद नागी ने बड़ा दावा किया है. उनके मुताबिक, यमन का सत्तारूढ़ हूती अंसारुल्लाह आंदोलन अपने क्षेत्रीय जल क्षेत्र में स्थिति को और गंभीर बनाने में पूरी तरह सक्षम है.
अगर यमन सच में इस रास्ते को बंद कर देता है, तो इससे दुनिया भर में तेल की कीमतों और शिपिंग इंडस्ट्री पर बड़ा असर पड़ सकता है.
अहमद नागी के मुताबिक, ‘अगर यमन बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद कर देता है, तो अमेरिका पर तेल की कीमतों का दबाव दोगुना हो जाएगा. इसकी वजह ये है कि ईरान पहले से ही फारस की खाड़ी में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण रखता है. अगर ये दोनों प्रमुख रास्ते बंद हो जाते हैं, तो ग्लोबल एनर्जी सप्लाई ठप हो सकती है.’
नागी ने बताया कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लागू करता है और ईरान को इसका नुकसान महसूस होने लगता है, तो हूती आंदोलन बाब-अल-मंदेब में बड़ा कदम उठा सकता है. उन्होंने कहा, ‘जब ईरान दर्द महसूस करेगा, तो हूती बहुत मुमकिन है कि इस अहम समुद्री रास्ते पर अपनी कार्रवाई बढ़ा देंगे.’
ग्लोबल इकोनॉमी पर सीधा असर
यमन की चेतावनी के मुताबिक, बाब-अल-मंदेब में किसी भी तरह की पाबंदी से ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री पर दबाव की एक और परत जुड़ जाएगी. पहले से ही तनाव झेल रही अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन के लिए ये स्थिति घातक साबित हो सकती है. इससे न सिर्फ तेल बल्कि दूसरी जरूरी चीजों की ढुलाई भी प्रभावित होगी, जिसका सीधा असर ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ेगा.
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इससे पहले यमन के अंसारुल्लाह प्रतिरोध आंदोलन ने इस ओर इशारा किया था कि अगर अमेरिका और इजरायल, ईरान पर दोबारा हमले करता है, तो वो भी अपने सैन्य अभियानों को तेज कर देगा.
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