नोएडा में कैसे चूक गई पुलिस, कहां मात खा गए अफसर… पांच दिन से कर्मचारियों में सुलग रहा था गुस्सा, सब सिर्फ देखते रहे – Noida police fail liu intelligence lapse workers protest 80 factorie violence IAS IPS DM SSP failure lclg


नोएडा कल (सोमवार) को जो हुआ, वह अचानक नहीं था. सवाल उठ रहे हैं कि जब पांच दिन से मजदूर अलग-अलग फैक्ट्रियों के बाहर बैठकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे, तब पुलिस और प्रशासन क्या कर रहा था ? आखिर क्यों हालात को भांपने में चूक हुई और क्यों समय रहते इंतजाम नहीं किए गए ?

नोएडा में 13 अप्रैल को हालात उस वक्त बिगड़ गए जब सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी सड़कों पर उतर आए. देखते ही देखते नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई औद्योगिक इलाकों में बवाल होने लगा. सड़कें जाम हो गईं, कई जगह आगजनी हुई और 80 से ज्यादा फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की खबरें सामने आईं. करीब तीन घंटे तक शहर के अहम हिस्सों में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा.

पहले से थे संकेत, फिर भी तैयारी क्यों नहीं ?

9 अप्रैल से शुरू हुई हड़ताल कोई छुपी हुई बात नहीं थी. फैक्ट्रियों के बाहर मजदूरों का जुटना, नारेबाजी और धरना ये सब खुलेआम हो रहा था. 10 अप्रैल को ट्रैफिक डायवर्जन तक करना पड़ा, यानी प्रशासन को हालात की गंभीरता का अंदाजा था. इसके बावजूद पुलिस बल की संख्या नहीं बढ़ाई गई. जिन इलाकों में भीड़ बढ़ रही थी, वहां अतिरिक्त फोर्स की तैनाती नहीं की गई. जब 13 अप्रैल को भीड़ उग्र हुई, तो कई जगहों पर गिनती के पुलिसकर्मी ही नजर आए. भीड़ के सामने वे मूक दर्शक बनकर रह गए.

इंटेलिजेंस फेलियर या लापरवाही?

नोएडा पुलिस में लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) जैसी महत्वपूर्ण इकाई मौजूद है, जिसका काम ही ऐसे आंदोलनों पर नजर रखना और समय रहते इनपुट देना होता है. लेकिन इस मामले में सवाल उठ रहे हैं कि क्या LIU ने सही आंकलन नहीं किया या उसकी रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लिया गया? अगर पांच दिन से हजारों मजदूर एकजुट हो रहे थे, तो क्या यह जानकारी अधिकारियों तक नहीं पहुंची? और अगर पहुंची, तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

गुरुग्राम से नहीं लिया सबक?

3 अप्रैल को गुरुग्राम के मानेसर इलाके में भी मजदूरों का आंदोलन हिंसक हो गया था. वहां फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई थी. यानी एक ताजा उदाहरण सामने था कि मजदूरों का असंतोष किस तरह अचानक हिंसा में बदल सकता है.
ऐसे में सवाल यह है कि जब नोएडा में वैसा ही माहौल बन रहा था, तो पुलिस और प्रशासन ने गुरुग्राम की घटना से सबक क्यों नहीं लिया?

तीन घंटे तक ‘बंधक’ रहा हाई-टेक शहर

13 अप्रैल को जब हालात बिगड़े, तो नोएडा के सेक्टर-59, सेक्टर-62, फेज-2 और सेक्टर-63 जैसे इलाकों में हिंसा और अराजकता का माहौल दिखा. सैकड़ों की भीड़ के सामने मुट्ठी भर पुलिसकर्मी तैनात थे. कई जगह आगजनी होती रही, सड़कें जाम रहीं और आम लोग फंसे रहे. करीब तीन घंटे तक हालात ऐसे रहे, जहां कानून-व्यवस्था पूरी तरह चुनौती के सामने नजर आई.

पुलिस का दावा अब सब शांत

पुलिस का कहना है कि उसने संयम के साथ स्थिति को संभाला, न्यूनतम बल प्रयोग किया और फायर सर्विस के साथ मिलकर आग पर काबू पाया. पूरे घटनाक्रम के दौरान भीड़ को शांत करने और हटाने की कोशिश की गई. कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में त्वरित कार्रवाई करते हुए हालात को नियंत्रण में लाया गया. अलग-अलग थानों में 7 मुकदमे दर्ज किए गए हैं और कई लोगों को हिरासत में लिया गया है. पुलिस का दावा है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शांति बहाल हो चुकी है.

अब बढ़ गई सैलरी

सोमवार को नोएडा में श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन और आगजनी के बाद  योगी सरकार ने देर रात न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी कर दी है. अंतरिम वेतन वृद्धि के नए आदेश 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे. अलग-अलग श्रेणियां में अधिकतम करीब 3000 तक इजाफा हुआ है. यह तात्कालिक फैसला है, आगे व्यापक समीक्षा के बाद वेज बोर्ड के माध्यम से स्थाई समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

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