इटली की जॉर्जिया मेलोनी की सरकार और अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के बीच हमेशा से मजबूत रिश्ते रहे हैं लेकिन ईरान युद्ध ने इस रिश्ते को भी कमजोर कर दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि मेलोनी की सरकार ने ईरान के खिलाफ युद्ध में साथ देने से मना किया है जिससे वो हैरान हैं, उन्होंने जॉर्जिया मेलोनी पर करारा प्रहार करते हुए कहा है कि उनका साथ न देकर मेलोनी अपने लोगों के हितों के साथ खिलवाड़ कर रही हैं.

मंगलवार को इटली के प्रमुख अखबार Corriere della Sera को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने मेलोनी पर खुलकर हमला बोला. इस विशेष बातचीत में उन्होंने मेलोनी के रवैये पर हैरानी जताते हुए आरोप लगाया कि वो ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर अमेरिका का साथ देने से इनकार कर रही हैं और इटली के हितों के लिए भी कदम नहीं उठा रहीं.

ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगा था कि उनमें हिम्मत है, लेकिन मैं गलत था. मैं तो उनके इस रवैये से हैरान हो गया हूं.’

छह मिनट के टेलीफोन इंटरव्यू में ट्रंप ने मेलोनी की कड़ी आलोचना की, जबकि कुछ हफ्ते पहले इसी अखबार से बातचीत में उन्होंने उनकी जमकर तारीफ की थी. मार्च में ट्रंप ने मेलोनी को बेहतरीन नेता और दोस्त बताया था, लेकिन अब उन्होंने कहा है कि वो मेलोनी को लेकर गलत थे.

मेलोनी पर ट्रंप के बड़े आरोप

ट्रंप ने आरोप लगाया कि मेलोनी ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ देने से बच रही हैं और चाहती हैं कि अमेरिका ही उनकी ओर से कार्रवाई करे.

उन्होंने कहा, ‘वो बस एक ही बात कहती हैं कि इटली इसमें शामिल नहीं होना चाहता. उन्हें लगता है कि अमेरिका उनके लिए काम करे.’

जब पूछा गया कि क्या दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर बात हुई है, तो ट्रंप ने कहा कि दोनों ने काफी समय से बातचीत नहीं की है. उन्होंने कहा, ‘वो नाटो में हमारी मदद नहीं करना चाहतीं, न ही परमाणु हथियार से छुटकारा पाने में. वो वैसी नहीं हैं, जैसा मैंने सोचा था.’

हॉर्मुज स्ट्रेट पर माइंसवीपर यानी समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने वाले सिस्टम भेजने के सवाल पर ट्रंप ने पश्चिमी देशों के रक्षा समूह नाटो की आलोचना की. उन्होंने कहा, ‘मैंने उनसे जो चाहें, भेजने को कहा, लेकिन वो नहीं चाहते, क्योंकि नाटो एक कागजी शेर है.’

‘इटली को दो मिनट में तबाह कर सकता है ईरान’

अमेरिकी राष्ट्रपति से मेलोनी की उस टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया मांगी गई, जिसमें उन्होंने पोप पर बयान के लिए ट्रंप की आलोचना की थी. ट्रंप ने कहा था कि पोप लियो XIV को ईरान के परमाणु खतरे की समझ नहीं है इसलिए उन्हें इस मुद्दे पर चुप रहना चाहिए. ट्रंप की इस टिप्पणी को मेलोनी ने अस्वीकार्य बताया था.

इस पर ट्रंप ने पलटवार करते हुए कहा, ‘अस्वीकार्य तो आप हैं, क्योंकि आपको इस बात की परवाह नहीं है कि ईरान के पास परमाणु हथियार हो सकता है और मौका मिलने पर वो इटली को दो मिनट में तबाह कर सकता है. आप नाटो में हमारी मदद नहीं करना चाहतीं और न ही परमाणु हथियारों के मुद्दे पर हमारा साथ दे रही हैं.’

इससे पहले पोप फ्रांसिस को ‘बेहद खराब’ पोप बताते हुए ट्रंप ने कहा था, ‘उन्हें समझ नहीं है और उन्हें युद्ध पर बोलना भी नहीं चाहिए, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि क्या हो रहा है.’

ट्रंप ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इटली के आम लोग अपनी प्रधानमंत्री के ‘कुछ न करने’ से संतुष्ट हैं. उन्होंने चेतावनी दी, ‘इटली पहले जैसा देश नहीं रहेगा. क्या इटली के लोगों को यह पसंद है कि आपकी प्रधानमंत्री तेल हासिल करने के लिए कुछ नहीं कर रही हैं? क्या उन्हें यह अच्छा लगता है? मैं इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता.’

सबसे करीबी यूरोपीय देश से बढ़ी दूरी

यह घटना ट्रंप और मेलोनी के मजबूत रिश्तों में बड़ी कमजोरी का संकेत है. जनवरी 2025 में ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में मेलोनी एकमात्र यूरोपीय नेता थीं जिन्हें आमंत्रित किया गया था. उस दौरान वो अमेरिका व यूरोप के बीच सेतु की भूमिका निभा रही थीं.

लेकिन अब ईरान, नाटो और पोप से जुड़े मुद्दों पर मतभेदों के चलते यह रिश्ता कमजोर पड़ता नजर आ रहा है.

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