वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश तेज कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, इस्लामाबाद ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के दूसरे दौर की मेजबानी का प्रस्ताव रखा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि ईरान पर बातचीत अगले दो दिनों में पाकिस्तान में हो सकती है.

पाकिस्तानी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह प्रस्ताव आने वाले दिनों में लागू किया जा सकता है, बशर्ते दोनों पक्ष किसी अन्य स्थान की मांग न करें. उनका कहना है कि पहली वार्ता भले ही किसी समझौते पर नहीं पहुंच सकी, लेकिन इसे एक सतत कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, न कि एक बार की पहल की बात है.

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, उप प्रधानमंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर खुद इस दिशा में पहल कर रहे हैं. माना जा रहा है कि इन कोशिशों का मकसद खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते टकराव को स्थिर रूप से शांत करना है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत को दोबारा शुरू करने के लिए लगातार संपर्क रखा जा रहा है. संभावना जताई जा रही है कि 21 अप्रैल को खत्म हो रहे 2 सप्ताह के संघर्ष विराम से पहले ही वार्ता का दूसरा दौर आयोजित किया जा सकता है. ये बैठक 14 अप्रैल को इस्लामाबाद में हो सकती है, हालांकि, पुष्टि अभी बाकी है.

हालांकि, इसी दिन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का सऊदी अरब और तुर्की के दौरे का कार्यक्रम भी तय है, जहां वह क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निमंत्रण पर जा सकते हैं. ऐसे में बैठक की तारीख और स्वरूप को लेकर अंतिम फैसला परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. इससे पहले 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में शांति वार्ता को लेकर अहम बैठक हुई थी.

इसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने आमने-सामने बातचीत की थी. 47 वर्षों में दोनों देशों के बीच पहली सीधी वार्ता थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि बातचीत की संभावना बनी हुई है.

ट्रंप ने कहा था, “हमें दूसरी तरफ से बुलाया गया है. वे समझौता करना चाहते हैं.” वहीं, जेडी वेंस ने भी बातचीत में कुछ प्रगति होने की बात कही थी. गौरतलब है कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के बाद हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं. 8 अप्रैल को पाकिस्तान की पहल पर दोनों पक्षों ने दो सप्ताह के संघर्ष विराम पर सहमति जताई थी.

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