2050 तक हर चौथे इंसान को होगी लिवर की बीमारी! वैज्ञानिकों की चेतावनी को न करें अनदेखा – metabolic liver disease study 2050 global health impact tvism

ByCrank10

April 15, 2026 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


लिवर इंसानी शरीर का काफी जरूरी अंग है इसलिए इसकी हेल्थ का ख्याल रखना काफी जरूरी है. अक्सर एक्सपर्ट्स समय-समय पर लिवर हेल्थ पर ध्यान देने की भी सलाह देते हैं. लेकिन हाल ही में एक डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है. दरअसल, खानपान की गलत आदतों और मोटापे के कारण होने वाली मेटाबॉलिक लिवर डिजीज (MASLD) ग्लोबल बीमारी बनने की कगार पर है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 25 सालों में दुनिया की बड़ी आबादी इस बीमारी की चपेट में होगी. डराने वाली बात ये है कि यह बीमारी सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि ये युवाओं को भी अपनी चपेट में लेगी.

क्या कहती है स्टडी

लैंसेट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी मैग्जीन में पब्लिश हुई स्टडी के मुताबिक, 2050 तक दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत आबादी यानी करीब 200 करोड़ लोग मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीयोटिक लिवर डिजीज से पीड़ित होंगे.

हालिया आंकड़ों की बात करें तो अभी दुनिया भर में करीब 1.3 अरब लोग MASLD से पीड़ित हैं. आंकड़ों को देखकर कहा जा सकता है कि पिछले करीब 30 साल में 143 प्रतिशत की बढ़त हुई है और हर 6 में 1 व्यक्ति यानी करीब 16 प्रतिशत लोग इससे पीड़ित हैं.

रिसर्च में पाया गया है कि 1990 में लगभग 5 करोड़ लोग MASLD से पीड़ित थे और 2023 तक ये आंकड़े बढ़कर 13 करोड़ हो गए. अनुमान है कि 2050 तक MASLD से 18 करोड़ लोग प्रभावित होंगे जो 2023 की तुलना में 42 प्रतिशत की वृद्धि दिखाते हैं.

MASLD पुरुषों में महिलाओं की तुलना में ज्यादा पाया जाता है. यह बीमारी सबसे ज्यादा 80 से 84 साल के बुजुर्गों में दिखती है, लेकिन असल में सबसे ज्यादा लोग जो इससे प्रभावित होते हैं, वे कम उम्र के यानी करीब 35-39 साल के पुरुषों और 55-59 साल की महिलाएं होती हैं.

क्या है इस बीमारी के बढ़ने का कारण

रिपोर्ट में सामने आया है कि इस बीमारी के बढ़ने की सबसे बड़ी वजह वेस्टर्न डाइट और फिजिकल एक्टिविटी में कमी को माना जा रहा है. अधिक चीनी, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और सैचुरेटेड फैट का सेवन लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है.

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि गरीब और मध्यम आय वाले देशों में यह संकट और भी गहरा सकता है, क्योंकि वहां स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता की कमी है. लिवर में फैट जमने की यह प्रक्रिया शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखाती, जिससे इसे साइलेंट किलर भी कहा जा रहा है. फिर जब संकेत सामने आते हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है.

बीमारी से बचाव का तरीका

एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि यह बीमारी सीधे तौर पर टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे से जुड़ी हुई है. अगर समय रहते लाइफस्टाइल में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले समय में कम उम्र में ही लिवर की बीमारियों के साथ लिवर फेलियर और लिवर कैंसर के मामलों में उछाल देखने मिलेगा.

इसलिए सभी को अपनी डाइट का ख्यान रखना चाहिए, ऑयली चीजों से बचना चाहिए, फिजिकली रूप से एक्टिव रहना चाहिए. स्टडी में सरकारों ये भी अपील की गई है कि वे मीठी ड्रिंक्स और जंक फूड्स के एड पर टैक्स बड़ाने की अपील की है.

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