भारत के बड़े हिस्से में हीटवेव का अलर्ट… 45 °C पहुंचेगा पारा, भीषण गर्मी का हेल्थ पर क्या होता है असर? – Heatwave Alert Across India as Temperatures Near 45 degree Celsius Raises Health Concerns ntc dpmx


भारत के बड़े हिस्से में अगले कुछ दिनों में लू का असर देखने को मिलेगा, जिससे तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक, मध्य और पूर्वी भारत में हीटवेव की स्थिति बन सकती है. नागपुर, भोपाल, अमरावती और भुवनेश्वर जैसे शहरों में तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है.

दिल्ली-एनसीआर में भी इस सीजन में पहली बार तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है, जबकि उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में तापमान 42-43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की उम्मीद है.

तेज गर्मी का शरीर पर असर

जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, शरीर पर दबाव बढ़ने लगता है. रोहैम्पटन यूनिवर्सिटी की रिसर्च के मुताबिक, तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा पहुंचने पर इंसान के सांस लेने की गति तेज हो जाती है और दिल की धड़कन बढ़ जाती है. पारा 40 डिग्री सेल्सियस पहुंचने पर शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है और 35% अधिक एनर्जी खर्च करनी पड़ती है. अगर इंसान लंबे समय तक 40 डिग्री या उससे अधिक तापमान में रहे तो उसे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरों का सामना करना पड़ सकता है. 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में लंबे समय तक रहने पर दिमाग को नुकसान पहुंचने का खतरा भी रहता है.

गर्मी से होने वाली बीमारियां

डॉक्टरों के मुताबिक, तेज गर्मी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है. हीट रैश, मांसपेशियों में ऐंठन, डिहाइड्रेशन और हीटस्ट्रोक आम समस्याएं हैं. खासकर डायबिटीज या किडनी रोग से पीड़ित लोगों में खतरा ज्यादा होता है. हीट एग्जॉशन में अधिक पसीना आना, कमजोरी, मतली और ऐंठन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. यदि यह हीटस्ट्रोक में बदल जाए और शरीर का तापमान 40 डिग्री से ऊपर चला जाए, तो दिमाग ठीक से काम करना बंद कर सकता है, दौरे (Seizures) पड़ सकते हैं और ऑर्गन फेलियर का खतरा हो सकता है, जिसके लिए तुरंत इलाज जरूरी है. अधिक पसीने से शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है, जिससे चक्कर आने और बेहोशी की संभावना बढ़ जाती है.

डाइजेस्टिव सिस्टम पर असर

अत्यधिक गर्मी डाइजेस्टिव सिस्टम को भी प्रभावित करती है. शरीर को ठंडा रखने के लिए ब्लड स्किन की ओर ज्यादा जाता है, जिससे डाइजेशन स्लो हो जाता है. इसके कारण पेट में भारीपन लगना, भूख कम होना, एसिडिटी और इनडाइजेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. डिहाइड्रेशन इस स्थिति को और खराब करता है, जिससे कब्ज और पेट दर्द की समस्या बढ़ सकती है. बुजुर्गों और कम पानी पीने वाले लोगों में यह समस्या अधिक देखी जाती है.

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

तेज गर्मी मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है. मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन और फोकस करने में कठिनाई हो सकती है. लंबे समय तक गर्मी में रहने से एंग्जायटी और डिप्रेशन का खतरा भी बढ़ सकता है.

गर्मियों में कैसे रहें सुरक्षित

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की गाइडलाइंस

  1. रात में कमरे और घर की खिड़कियां खोलकर रखें और दिन में बंद रखें, धूप रोकने के लिए पर्दे लगाएं.
  2. अनावश्यक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को बंद रखें.
  3. पंखे और एसी का सही उपयोग करें (एसी 27°C पर रखें).
  4. रोज 2-3 लीटर पानी पिएं, शराब और कैफीन के सेवन से बचें, इससे डिहाइड्रेशन होता है.
  5. अधिक फल और सब्जियां खाएं.
  6. बाहर जाते समय ORS साथ रखें और हर 2 घंटे में पानी पिएं.
  7. हल्के रंग के और ढीले कपड़े पहनें.
  8. बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखें.

जलवायु परिवर्तन के कारण लू की घटनाएं बढ़ रही हैं, ऐसे में सतर्क रहना और समय रहते बचाव करना बेहद जरूरी है.

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