सम्राट का प्रमोशन, क्या विजय सिन्हा का होगा डिमोशन? बीजेपी के सामने एडजस्ट करने की चुनौती – samrat chaudhary bihar cm bjp promotion vijay kumar sinha political dimotin ntcpkb

ByCrank10

April 16, 2026


बिहार में नीतीश कुमार की जगह सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बन गए हैं. बुधवार को सम्राट ने सीएम पद तो जेडीयू कोटे से विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली. बिहार के इतिहास में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बना है. सम्राट चौधरी का डिप्टीसीएम से सीएम पद पर सियासी प्रमोशन हो गया है, लेकिन विजय कुमार सिन्हा का क्या होगा?

2024 से नीतीश सरकार में बीजेपी कोटे से सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा डिप्टीसीएम थे. अब सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद सम्राट चौधरी का कद बढ़ गया है, लेकिन दूसरे डिप्टीसीएम रहे विजय कुमार सिन्हा के सियासी भविष्य की तस्वीर साफ नहीं है.

सवाल यही है कि विजय कुमार सिन्हा को सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में मंत्री बनाया जाएगा या फिर तारकेश्वर प्रसाद और रेणुदेवी की तरह कैबिनेट से छुट्टी हो जाएगी. ऐसे में सभी की निगाहें विजय कुमार सिन्हा पर लगी हुई है कि बीजेपी उन्हें क्या सियासी ओहदा देती है?

विजय कुमार सिन्हा का सियासी दर्द
बिहार के पूर्व डिप्टीसीएम विजय कुमार सिन्हा बीजेपी के दिग्गज नेताओं में से एक है, जो विधायक से लेकर मंत्री और विधानसभा के स्पीकर तक का रोल अदा दिया है. इतना ही नहीं नीतीश के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार में दो बार डिप्टीसीएम रहे. आरएसएस की पाठशाला से निकले हैं और बीजेपी से ही अपनी राजनीतिक पारी का आगाज किया है, लेकिन जब बारी बिहार में बीजेपी के सीएम की आई तो लाटरी सम्राट चौधरी की लग गई, जो आरजेडी और जेडीयू से होते हुए बीजेपी में आए हैं.

बीजेपी विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी के नाम पर मुहर लगने के बाद विजय कुमार सिन्हा ने मीडिया से कहा पार्टी को सत्ता में लाने के लिए उन्होंने लंबे वक्त तक जमीन पर मेहनत की और पसीना बहाया. पार्टी के लिए लहू बहाया, बलिदान दिया. विजय कुमार सिन्हा यहीं नहीं रुके, उन्होंने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने के फैसले को नेतृत्व का आदेश बताया.

कमल खिलाने का अवसर आया तो मैंने भाजपा का सिपाही के नाते अपने कमांडर के आदेश के अनुसार पार्टी विधायकमंडल की बैठक में नेता के रूप में सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव किया. विजय कुमार सिन्हा के इस बयान को राजनीतिक दृष्टि के काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें उनका दर्द भी झलक रहा है और शीर्ष नेतृत्व के आदेश को मानने की मजबूरी?

डिप्टीसीएम से हटने के बाद क्या होगा?
नीतीश कुमार की एनडीए सरकार में जनवरी 2024 और नवंबर 2025 में विजय कुमार सिन्हा डिप्टीसीएम बनाए गए थे. इससे पहले विधानसभा के स्पीकर और बीजेपी के विपक्ष में रहते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का रोल भी अदा किया. नीतीश कैबिनेट में सम्राट के साथ उपमुख्यमंत्री रहे विजय कुमार सिन्हा ने अपने कुछ महीनों के कार्यकाल में कई अहम कदम उठाए हैं, जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ व भूमि सुधार से लेकर कठोर कदम उठाए है.

बिहार में बीजेपी के अगुवाई वाली सरकार बन गई है. विजय कुमार सिन्हा को सत्ता नेतृत्व वाली टीम में जगह नहीं मिली जबकि उनके समकक्ष रहे सम्राट चौधरी को डिप्टीसीएम से सीएम बना दिया गया. विजय कुमार सिन्हा भूमिहार जाति से आते हैं, जो बीजेपी का परंपरागत वोट है. ऐसे में विजय कुमार सिन्हा का सियासी रोल क्या होगा?

तारकेश्वर और रेणी देवी कहीं न बना जाए?
बिहार की सियासत में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बना है, इससे पहले एनडीए की जिनती भी सरकारें बनी है, उसमें सीएम की कुर्सी नीतीश के पास रही और बीजेपी को डिप्टीसीएम पद ही मिलता रहा. 2005 से लेकर 2021 तक जितनी भी एनडीए की सरकार बनी, उसमें सुशील मोदी बीजेपी कोटे से डिप्टीसीएम बनते रहे.

2021 में एनडीए की सरकार बनी तो बीजेपी ने सुशील मोदी की डिप्टीसीएम पद से छुट्टी कर उनकी जगह पर तारकेश्वर प्रसाद और रेणु देवी को डिप्टीसीएम बनाया था. सुशील मोदी को बीजेपी राज्यसभा सदस्य बनाकर दिल्ली की सियासत में ले आई थी. इस तरह बिहार की राजनीति से छुट्टी हो गई थी.

तारकेश्वर प्रसाद और रेणु देवी 2021 से लेकर 2022 तक नीतीश कैबिनेट में डिप्टीसीएम रहे, उसके बाद नीतीश ने सियासी पलटी मारकर RJD सेमिलकर सरकार बना ली थी. इसके बाद नीतीश कुमार 2024 में दोबारा बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई तो तारकेश्वर प्रसाद और रेणु देवी को डिप्टीसीएम नहीं बनाया गया और न ही उन्हें कैबिनेट में जगह दी गई. बीजेपी ने उनकी जगह पर सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा को डिप्टीसीएम बनाने का काम किया.

सम्राट चौधरी का अब सियासी प्रमोशन कर बीजेपी ने बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया है, लेकिन विजय कुमार सिन्हा को फिलहाल कैबिनेट में एंट्री नहीं मिली. इसकी वजह यह है कि बीजेपी की जगह पर जेडीयू कोटे से दो डिप्टीसीएम बने हैं, जिसके चलते विजय कुमार सिन्हा को डिप्टीसीएम नहीं बनाया गया है. बीजेपी का पैटर्न को देखते हुए कहा जा रहा है कि विजय कुमार सिन्हा के साथ कहीं तारकेश्वर प्रसाद और रेणु देवी की तरह न हो.

विजय सिन्हा बीजेपी कैसे करेगी एडजस्ट
विजय कुमार सिन्हा बिहार बीजेपी के दिग्गज नेताओं में से एक हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1988 में बीजेपी के सदस्य बनने के साथ हुई थी. उन्हें शुरू में पार्टी संगठन का काम सौंपा गया था. बीजेपी के बूथ लेवल कार्यकर्ता से लेकर डिप्टीसीएम बनने तक का सफर तय किया है. विजय कुमार सिन्हा का बीजेपी में पिछले कुछ सालों में सियासी प्रभाव बढ़ा.

2005 के चुनाव में बीजेपी ने उनको पहली बार लखीसराय विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया. वे इस चुनाव में जीत गए. 2010 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में लखीसराय सीट पर फिर जीते. इसके बाद विजय कुमार सिन्हा का विजय रथ कभी नहीं थमा. वे लगातार 2015, 2020 और 2025 में विधायक बने. उन्होंने कभी अपनी विधानसभा सीट भी नहीं बदली. 2017 में पहली बार मंत्री बने और फिर विधानसभा स्पीकर.

बिहार के बड़े भूमिहार नेताओं में उनकी गिनती होती है. ऐसे में अब सम्राट चौधरी सरकार में विजय कुमार सिन्हा को एडजस्ट करना बड़ी चुनौती है. ऐसे में अब देखना है कि विजय कुमार सिन्हा को बीजेपी सम्राट सरकार में मंत्री बनाती है या फिर संगठन में सियासी अहमियत देती है. ये बात आने समय में पता चलेगी?

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