तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चुनाव कैंपेन का थीम अचानक बदल दिया है. पहले डीएमके के कैंपेन में क्षेत्रवाद बनाम राष्ट्रवाद, भाषा और विकास जैसे मुद्दे छाए हुए थे. अब ये सब पीछे छोड़ दिए गए हैं – तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके का पूरा फोकस अब परिसीमन के मुद्दे पर आ टिका है.

परिसीमन के मुद्दे पर एमके स्टालिन कड़े विरोध का ऐलान तो पहले ही कर चुके हैं, अपनी घोषणा के मुताबिक स्टालिन ने काला झंडा फहरा कर परिसीमन के प्रस्ताव का विरोध किया है. डीएमके के साथ कांग्रेस का तमिलनाडु में चुनावी गठबंधन तो है ही, सपोर्ट में राहुल गांधी भी परिसीमन का विरोध कर रहे हैं.

AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, क्योंकि टीवीके नेता थलपति विजय भी परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं. AIADMK के नेता सार्वजनिक तौर पर तो परिसीमन के मुद्दे पर बोलने से बच रहे हैं, लेकिन समर्थकों को केंद्र के आश्वासन का हवाला देकर भरोसा दिलाने की कोशिश हो रही है. AIADMK की तरफ से नेताओं और कार्यकर्ताओं के जरिए लोगों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेकर भरोसा दिलाया जा रहा है कि तमिलनाडु पर परिसीमन से किसी तरह का कोई अलग प्रभाव नहीं पड़ने जा रहा है.

डीएमकेः बदली कैंपेन स्ट्रैटेजी

डीएमके नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रस्तावित परिसीमन विधेयक की कॉपी जलाकर अपना विरोध जताया है. स्टालिन ने चेन्नई में विरोधस्वरूप काला झंडा भी फहराया. विरोध प्रदर्शन के दौरान स्टालिन और डीएमके समर्थक काले कपड़े पहने हुए थे.

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में स्टालिन ने परिसीमन को डीएमके के चुनाव अभियान का सबसे आक्रामक मुद्दा बना दिया है. सोशल मीडिया के जरिए तीखे हमले बोल रहे हैं. और करीब 500 डिजिटल विशेषज्ञों से लैस डीएमके की सोशल मीडिया टीम स्टालिन की बातों को वोटर तक पहुंचाने में युद्ध स्तर पर जुटी हुई है.

1. सड़कों पर लगे बैनर, पोस्टर और होर्डिंग बदले जा रहे हैं और नए लगाए जा रहे हैं. क्षेत्रवाद बनाम राष्ट्रवाद, भाषाई भेदभाव और विकास जैसे मुद्दों पर चल रहा चुनाव कैंपेन परिसीमन के विरोध पर फोकस हो गया है.

2. मौका और परिसीमन की राजनीतिक अहमियत को समझते हुए स्टालिन ने परिसीमन के विरोध पर पूरी ताकत झोंक दी है. मतदान में हफ्ते भर का वक्त बचा है, और डीएमके ने कैंपेन की रणनीति ही बदल दी है. लोगों को बताया जा रहा है कि कैसे तमिलनाडु के साथ केंद्र सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है.

3. परिसीमन के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत काले झंडे के साथ प्रदर्शन से हुई है. डीएमके सांसदों और जिला सचिवों को कहा गया है कि आम बोलचाल की भाषा में वे लोगों को समझाएं कि दिल्ली में तमिलनाडु के खिलाफ क्या क्या चल रहा है.

4. डीएमके कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि हर मैसेज में वे ‘तमिल गौरव’ की लड़ाई का जिक्र जरूर करें. केंद्र सरकार के खिलाफ स्टालिन का जो मैसेज है, सबसे पहले डीएमके कार्यकर्ताओं तक पहुंच रहा है, जिसे आगे बढ़ाते रहने को कहा गया है.

5. सोशल मीडिया टीम विपक्षी दलों को रियल टाइम जवाब देने में जुटी है. लोगों को समझाया जा रहा है कि यह टैक्स बनाम रिटर्न की लड़ाई है. तमिलनाडु केंद्र को टैक्स देता है, और रिटर्न में तमिलनाडु के लोगों को परिसीमन बिल मिलता है.

डीएमके कार्यकर्ताओं की वर्चुअल बैठक को संबोधित करने के बाद एमके स्टालिन ने कहा था, ‘हमारे सिर पर लटकी तलवार, अब हम पर आ गिरी है.’

मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि बीजेपी आग से खेल रही है, और चेतावनी देते हुए बोले, आपको भारी कीमत चुकानी होगी. परिसीमन के मुद्दे पर स्टालिन पहले ही कह चुके हैं कि देश को एक बार फिर 1950 और 1960 के दशक वाली डीएमक से रू-ब-रू होना पड़ सकता है, जब डीएमके ने तमिलनाडु के लोगों के अधिकारों और कथित तौर पर हिंदी थोपे जाने के खिलाफ कई आंदोलनों का नेतृत्व किया था.

AIADMK : अमित शाह पर भरोसा है

परिसीमन के मुद्दे पर AIADMK नेता सार्वजनिक तौर पर बयान देने से बचते देखे जा रहे हैं, क्योंकि बीजेपी के साथ उनका चुनावी गठबंधन है. मालूम हुआ है कि AIADMK के सीनियर नेताओं ने जिला स्तर से लेकर गांवों तक हर जगह एक ही मैसेज भेजा है कि पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है.

1. AIADMK नेता ई. पलानीस्वामी की तरफ से भेजे जाने वाले संदेशों में लोगों को समझाने की कोशिश है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वस्त किया है कि परिसीमन से तमिलनाडु पर किसी तरह का कोई अलग प्रभाव नहीं पड़ेगा.

2. स्टालिन के दावों को खारिज करते हुए अमित शाह पहले ही कह चुके हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि परिसीमन के बाद भी दक्षिण के किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी. स्टालिन ने दावा किया था कि परिसीमन किया गया तो तमिलनाडु में लोकसभा की 8 सीटें कम हो जाएंगी. अमित शाह का कहना है कि तमिलनाडु एक भी संसदीय सीट नहीं खोने जा रहा है.

3. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन लगे हाथ यह बोलकर इमोशनल कार्ड खेल रहे हैं कि अगर AIADMK नेता जयललिता होतीं, तो वो भी परिसीमन का विरोध करतीं.

बीजेपी : सफाई के साथ काउंटर अटैक

तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके के. अन्नामलाई चुनाव तो नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन कैंपेन में बढ़ चढ़कर भाग ले रहे हैं. परिसीमन पर स्टालिन के वीडियो संदेश पर काउंटर अटैक करते हुए अन्नामलाई ने दुर्भाग्यपूर्ण और मुख्यमंत्री के तौर पर ली गई उनकी शपथ के खिलाफ बताया है. अन्नामलाई कहते हैं, वीडियो में मुख्यमंत्री ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह ठीक नहीं है. वो कह रहे हैं कि तमिलनाडु 1960 के दशक में लौट जाएगा, और प्रधानमंत्री को धमकी दे रहे हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है, और डर फैलाने की कोशिश है.

अन्नामलाई का कहना है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारी माताओं और बहनों को सम्मान और प्रतिनिधित्व देने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं… जब सितंबर, 2023 में यह बिल संसद में आया था, तब इसे सर्वसम्मति से पास किया गया था… अब प्रधानमंत्री इसे जल्द लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि महिलाओं को परेशानी न हो.

अन्नामलाई ने जोर देकर कहा है, हम एक प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं और कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी आबादी के आधार पर होगी.

विजय : परिसीमन के खिलाफ

तमिलनाडु चुनाव को त्रिकोणीय मुकाबला बनाने की कोशिश कर रहे थलपति विजय भी मौके का पूरा फायदा उठा रहे हैं. अपने रोड शो और सार्वजनिक सभाओं में विजय परिसीमन बिल का जोरदार विरोध कर रहे हैं.

विजय ने परिसीमन बिल को ‘सजा बनाम अवॉर्ड’ जैसा मसला बताया है. विजय का कहना है, परिसीमन बिल तमिलनाडु के लोगों के लिए सजा है, तो उत्तर भारतीयों के लिए अवॉर्ड.

अब विजय को डीएमके के लिए बड़ा खतरा बताया जा रहा था, लेकिन स्टालिन ऐसा मुद्दा लपक लिया है कि टीवीके का भी साथ मिलने लगा है. वैसे विजय अपनी लड़ाई अलग और अपने हिसाब से लड़ रहे हैं, लेकिन परिसीमन का मुद्दा विजय और स्टालिन के लिए बीजेपी और AIADMK के खिलाफ हमले का कॉमन एजेंडा हो गया है.

कांग्रेस : डीएमके के सुर में सुर मिला रही

सीनियर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने दावा किया था कि केंद्र सरकार के कदम से दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक आवाज दब जाएगी, और इसीलिए केरल और कर्नाटक जैसे राज्य भी खासे चिंतित हैं. परिसीमन बिल लाए जाने को सुनियोजित साजिश करार देते हुए चिदंबरम ने कहा कि बिल का मकसद चुनाव प्रचार में व्यस्त तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के सांसदों को सत्र में भाग लेने से रोकना है.

चिदंबरम ने कहा, चुनावों के दौरान संसद सत्र आयोजित करने की कोई हड़बड़ी नहीं है. तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव के कारण कुल 67 सदस्य सत्र में भाग नहीं ले पाएंगे. लेकिन, सदन में डीएमके और टीएमसी दोनों के सांसद पहुंचे थे.

असल में, अपने वीडियो मैसेज में स्टालिन ने पहले ही साफ कर दिया था कि संसद सत्र में डीएमके सांसद भाग लेंगे. उनका कहना था, ‘अगर ऐसा कुछ भी किया जाता है जो तमिलनाडु को नुकसान पहुंचाने वाला हो, या जो उत्तरी राज्यों की राजनीतिक शक्ति को असमान रूप से बढ़ाता है, तो हम तमिलनाडु में चुप नहीं रहेंगे.’

लोकसभा में DMK सांसद टीआर बालू ने सदन में पेश तीनों बिलों का विरोध किया. ने कहा, ये तीनों बिल, सैंडविच बिल हैं. हम विरोध करते हैं. हमारी पार्टी इसका विरोध करती है. हमने काले झंडे दिखाए.

डीएमके सांसद की बात पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि आप चाहे पीले झंडे दिखाओ या काले दिखाओ. सदन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.

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