उत्तर प्रदेश समाचार: भदोही पुलिस ने गुरुवार को साइबर धोखाधड़ी के आरोप में अंशुल मिश्रा, कपिल रावत और मोहम्मद शोएब नामक तीन युवकों को गिरफ्तार किया. ज्ञानपुर के एक रेहड़ी-पटरी वाले अमन बिंद द्वारा अपने और अपनी बहन के बैंक खातों के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराने के बाद यह रैकेट सामने आया. गिरोह ने सरकारी योजनाओं के तहत लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों के बैंक खाते खुलवाए और उनके एटीएम कार्ड व पासबुक अपने पास रख लिए. इन खातों का उपयोग दिल्ली, राजस्थान और झारखंड जैसे राज्यों में ठगी के पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया गया. अब तक 10 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की पुष्टि हो चुकी है.

सरकारी लोन के नाम पर बिछाया जाल

पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने बताया कि इस गिरोह का सदस्य अस्तित्व वर्मा उर्फ रौनक ग्राहकों के रूप में अमन बिंद जैसे लोगों से दोस्ती करता था. उसने बिंद को सरकारी स्कीम के तहत लोन दिलाने का लालच दिया और उसके खाते खुलवा लिए. आरोपियों ने इन खातों से जुड़े मोबाइल नंबर, पासबुक और एटीएम कार्ड अपने नियंत्रण में ले लिए. इसके बाद गिरोह ने इन खातों का इस्तेमाल देशभर में साइबर अपराध के जरिए जुटाए गए पैसों को ठिकाने लगाने के लिए किया.

200 बैंक खाते और 500 से ज्यादा शिकायतें

जांच में पता चला कि यह गिरोह व्हाट्सएप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम ग्रुप के जरिए बैंक खातों का विवरण साझा करता था. ये लोग शॉपिंग और क्रेडिट सेवाओं के नाम पर एपीके (APK) फाइलें भेजकर धोखाधड़ी करते थे. पकड़े गए आरोपियों के पास से जब्त चार एंड्रॉइड फोन में उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के खातों का डेटा मिला है. नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCPR) पर इन खातों के खिलाफ पहले ही 545 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं. पुलिस को अंदेशा है कि जांच बढ़ने पर ठगी का आंकड़ा 50 करोड़ तक जा सकता है.

19-21 साल के युवक ऐसे निकालते थे पैसा

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की उम्र महज 19 से 21 साल के बीच है. पुलिस के मुताबिक, ये युवक ठगी की रकम को एटीएम, पेट्रोल पंपों और क्रिप्टोकरेंसी चैनलों के माध्यम से निकालते थे. इसके बाद गिरोह के सदस्यों के बीच पैसा बांट दिया जाता था. इस गैंग में कुल पांच सदस्य बताए जा रहे हैं, जिनमें से अस्तित्व वर्मा और ध्रुव पाठक फिलहाल पुलिस की रडार पर हैं. पुलिस अब इस संगठित नेटवर्क के अन्य संपर्कों और ट्रांजेक्शन की गहराई से पड़ताल कर रही है.

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