नेपाल के दक्षिणी हिस्से में भारत से लगी सीमा पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. नेपाल के अधिकारियों ने भारतीय नंबर प्लेट वाली गाड़ियों पर सख्ती शुरू कर दी है. इससे नेपाल में रहने वाले उन हजारों लोगों की परेशानी बढ़ गई है जिन्होंने भारतीय नाम पर गाड़ियां खरीद रखी हैं. और अब नेपाल की राजनीतिक पार्टियां इस फैसले का विरोध कर रही हैं.
नेपाल के सरलाही जिले के अधिकारी होम प्रसाद घिमिरे ने बताया कि कोई नया नियम नहीं बनाया गया है. नियम पहले से ही थे लेकिन उन्हें ढंग से लागू नहीं किया जाता था. पिछले कुछ दिनों में भारतीय गाड़ियों के बिना इजाजत नेपाल में घुसने की घटनाएं बहुत बढ़ गई थीं. इससे टैक्स की चोरी, सुरक्षा को खतरा और अन्य गैरकानूनी गतिविधियां बढ़ने लगीं. इसलिए अब पुराने नियमों को सख्ती से लागू किया जा रहा है.
नियम क्या हैं?
नेपाल के मौजूदा नियमों के मुताबिक भारतीय गाड़ियां सीमावर्ती इलाकों में 24 घंटे तक बिना किसी शुल्क के रह सकती हैं. यह स्थानीय लोगों और व्यापार की सुविधा के लिए है. लेकिन अगर कोई भारतीय गाड़ी इससे आगे जानी है या ज्यादा समय रुकनी है तो उसे कस्टम ड्यूटी यानी आयात शुल्क देना होगा और गाड़ी का रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. जनकपुर जिले के पुलिस प्रवक्ता कमल थापा ने कहा कि बिना कस्टम क्लियरेंस के चल रही भारतीय गाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है.
असल समस्या क्या है?
असली मामला यह है कि मधेश प्रांत में रहने वाले बहुत से नेपाली लोगों ने भारत में अपने रिश्तेदारों या दोस्तों के नाम पर गाड़ियां खरीद ली हैं क्योंकि भारत में गाड़ियां सस्ती हैं. लेकिन यह गाड़ियां चलाते नेपाल में हैं और इनकी नंबर प्लेट भारतीय है. यह पूरी तरह गैरकानूनी है. अधिकारियों का कहना है कि मधेश प्रांत में हजारों ऐसी गाड़ियां हैं जो कानूनी तौर पर गलत तरीके से चल रही हैं.
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नेपाल सरकार ने क्या जानकारी मांगी?
नेपाल के गृह मंत्रालय ने मधेश प्रांत के सभी जिलों से यह जानकारी मांगी है कि उनके इलाके में कितनी भारतीय गाड़ियां चल रही हैं. यानी सरकार इस समस्या की पूरी तस्वीर समझना चाहती है.
राजनीतिक पार्टियों ने विरोध क्यों किया?
12 अप्रैल को नेपाल की कई बड़ी पार्टियों ने मिलकर एक बयान जारी किया जिसमें इस सख्ती का विरोध किया गया. इनमें सत्ताधारी राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी भी शामिल है. पार्टियों का कहना है कि चुनावों में वो खुद भारतीय गाड़ियों का इस्तेमाल करती हैं और अगर यह पाबंदी रही तो आंदोलन होगा. उन्होंने पुरानी 30 किलोमीटर की सीमा बहाल करने की मांग की जिसमें पहले बिना किसी पाबंदी के गाड़ियां आ-जा सकती थीं.
सरलाही में क्या हुआ?
सरलाही में हाल ही में एक सर्वदलीय बैठक हुई जिसमें नेपाली कांग्रेस, CPN-UML, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और जनता समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधि शामिल हुए. सभी ने माना कि विदेशी गाड़ियों के प्रवेश को बेहतर तरीके से मैनेज करना जरूरी है लेकिन स्थानीय लोगों की सुविधा भी ध्यान में रखनी होगी.
क्या भारत-नेपाल रिश्तों पर असर पड़ेगा?
नेपाल के पूर्व प्रांतीय मंत्री योगेंद्र यादव ने चेताया है कि अगर ऐसे कदम उठाए गए जो भारत और नेपाल के बीच पुराने सामाजिक और सांस्कृतिक रिश्तों को नुकसान पहुंचाएं तो यह दोनों देशों के बीच तनाव पैदा कर सकता है.
इनपुट: पीटीआई
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