दुनिया के दो बड़े युद्धक्षेत्र – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लेबनान – अब भी माहौल गर्म हैं. दो अधूरे सीजफायर (ईरान और लेबनान) चल रहे हैं. दोनों तरफ हथियार लोड हो रहे हैं. अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में और 10 हजार सैनिक भेज दिए हैं. ईरान कह रहा है कि अमेरिका हार चुका है.

इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू शांत नहीं हो रहे और हिज्बुल्लाह मानने को तैयार नहीं है. ऐसे में सवाल उठ रहा है – अमेरिका और ईरान का असली प्लान क्या है? क्या दोनों देश बड़े युद्ध की तैयारी कर रहे हैं या फिर कोई नया समझौता होने वाला है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लेबनान में क्या चल रहा है

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है. यहां से रोजाना करोड़ों बैरल तेल गुजरता है. ईरान ने कई बार धमकी दी है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह इस रास्ते को बंद कर देगा. अभी यहां दोनों तरफ जहाज और हथियार लोड हो रहे हैं. ईरान के जहाज ज्यादा सक्रिय हैं. अमेरिकी नौसेना भी अलर्ट मोड में है.

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अमेरिका ईरान योजना

दूसरी तरफ लेबनान में हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच लड़ाई थमी नहीं है. सीजफायर हुआ था लेकिन वह अधूरा है. हिज्बुल्लाह कह रहा है कि जब तक इजरायल पूरी तरह पीछे नहीं हटता, वह हथियार नहीं रखेगा. दोनों तरफ गोला-बारूद और मिसाइलें बढ़ रहे हैं. इन दो जगहों पर तनाव की वजह से पूरी दुनिया की तेल सप्लाई और सुरक्षा पर असर पड़ रहा है.

दो अधूरे सीजफायर और हथियारों की होड़

ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल का सीजफायर अभी टूटने के कगार पर है. दोनों तरफ आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है. ईरान कहता है कि अमेरिका ने वादा तोड़ा है. लेबनान में सीजफायर लागू नहीं हुआ. हिज्बुल्लाह ने साफ कहा है कि वह पूरी तरह मानने को तैयार नहीं. दोनों तरफ हथियार लोड होने की खबरें आ रही हैं.

ईरान अपने ड्रोन और मिसाइलें बढ़ा रहा है. अमेरिका और इजरायल भी अपने डिफेंस सिस्टम और फाइटर जेट्स को तैयार रखे हुए हैं. इस होड़ की वजह से छोटी-छोटी घटनाएं बड़े युद्ध में बदल सकती हैं. लोग डर रहे हैं कि कहीं फिर से बड़ा संघर्ष न शुरू हो जाए.

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अमेरिका ने 10 हजार और सैनिक क्यों भेजे

अमेरिकी सरकार ने अचानक मिडिल ईस्ट में 10 हजार अतिरिक्त सैनिक भेज दिए हैं. इनमें ज्यादातर नौसेना और एयर फोर्स के जवान हैं. अमेरिका का कहना है कि यह कदम सुरक्षा बढ़ाने के लिए उठाया गया है ताकि उसके सहयोगी देश सुरक्षित रहें. लेकिन ईरान इसे कमजोरी का संकेत बता रहा है.

ईरान के अधिकारी कह रहे हैं कि अमेरिका पहले ही हार चुका है और अब सिर्फ दिखावा कर रहा है. ये सैनिक मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लेबनान के पास तैनात किए जा रहे हैं. इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

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ईरान का दावा – अमेरिका हार चुका है

ईरान के नेता बार-बार कह रहे हैं कि अमेरिका युद्ध हार चुका है. उनका तर्क है कि अमेरिका ने ईरान पर सीधा हमला करने की हिम्मत नहीं दिखाई और अब सिर्फ सहयोगी देशों के जरिए काम चला रहा है. ईरान का मानना है कि उसकी मिसाइलें और ड्रोन इतने ताकतवर हैं कि अमेरिका अब बड़े युद्ध में नहीं पड़ना चाहता. ईरान कहता है कि वह अपने इलाके की रक्षा के लिए तैयार है. किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देगा.

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नेतन्याहू और हिज्बुल्लाह – दोनों नहीं मान रहे

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अब भी शांत नहीं हो रहे. वे कहते हैं कि हिज्बुल्लाह को पूरी तरह कमजोर किए बिना इजरायल सुरक्षित नहीं रहेगा. दूसरी तरफ हिज्बुल्लाह भी अपने रुख पर अड़ा हुआ है. वह कहता है कि जब तक इजरायल लेबनान की जमीन से पूरी तरह नहीं हटता, वह कोई समझौता नहीं करेगा. दोनों तरफ की यह जिद सीजफायर को कमजोर कर रही है.

अमेरिका – ईरान का क्या हो सकता है प्लान

अमेरिका का प्लान लगता है कि वह दबाव बनाकर ईरान को मेज पर लाना चाहता है. ज्यादा सैनिक भेजकर वह ईरान को चेतावनी दे रहा है कि कोई गलती न हो.साथ ही वह इजरायल को भी सपोर्ट दे रहा है. ईरान का प्लान रक्षा और दबाव दोनों का लगता है. वह हथियार बढ़ाकर अमेरिका को बता रहा है कि वह तैयार है लेकिन सीधे बड़े युद्ध में नहीं पड़ना चाहता. दोनों देश जानते हैं कि पूरा युद्ध बहुत महंगा और खतरनाक होगा.

इसलिए हो सकता है कि दोनों तरफ से गुप्त बातचीत चल रही हो. दुनिया इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या कोई नया समझौता होगा या फिर तनाव और बढ़ेगा. आम लोग डर रहे हैं कि कहीं फिर से बड़ा युद्ध न छिड़ जाए. अभी दोनों देशों का असली प्लान साफ नहीं है लेकिन हर कोई उम्मीद कर रहा है कि बातचीत से ही मामला सुलझे.

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