लखनऊ में एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसमें 15 दिन तक लावारिस पड़े एक मरीज को आखिरकार उसका परिवार मिल गया. इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका एक फोटो ने निभाई, जो इंस्टाग्राम पर शेयर हुई थी. इसी फोटो के जरिए परिवार तक खबर पहुंची और बिछड़ा हुआ अपना फिर से मिल सका.

कहते हैं कि अगर ऊपर वाला बचाने पर आए, तो कोई न कोई जरिया बन ही जाता है. 5 अप्रैल की बात है, जब मानक नगर का रहने वाला विशाल वर्मा सड़क किनारे बेहोश और बेहद गंभीर हालत में मिला था. किसी ने सुध नहीं ली, लेकिन पुलिस कांस्टेबल धर्मवीर ने इंसानियत दिखाई और उसे तुरंत उठाकर केजीएमयू (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया. विशाल वहां न्यूरो सर्जरी वार्ड में बेहोश पड़ा था, न कोई नाम पता था और न ही कोई अपना.

पुलिस ने जब पड़ताल शुरू की तो उसके आधार कार्ड से पहचान तो हो गई, लेकिन कहानी इतनी आसान नहीं थी. पुलिस जब उसके पुराने पते पर पहुंची तो पता चला कि परिवार वहां से उन्नाव शिफ्ट हो गया है. काफी मशक्कत के बाद उन्नाव में उसके परिजनों से संपर्क हुआ. पुलिस के सामने चुनौती बड़ी थी क्योंकि विशाल अब भी मौत से जंग लड़ रहा था और उसे अपनों के सहारे की सख्त जरूरत थी.

सोशल मीडिया बना मसीहा

यहीं से इस पूरी कहानी में सोशल मीडिया का बड़ा रोल शुरू हुआ. विशाल की फोटो अखबारों और व्हाट्सएप ग्रुप्स के साथ-साथ इंस्टाग्राम पर तेजी से वायरल होने लगी. लोग एक-दूसरे को फोटो भेज रहे थे और दुआएं कर रहे थे. आखिरकार, यह फोटो विशाल की पत्नी अंजली और उसकी बहन तक पहुंच गई. जैसे ही उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने विशाल को इस हालत में देखा, वे सब कुछ छोड़कर केजीएमयू अस्पताल की तरफ भागीं.

अस्पताल पहुंचने पर जो मंजर था, वो किसी की भी आंखों में आंसू ला दे. जो शख्स 15 दिन से लावारिस बनकर बेड पर पड़ा था, आज उसके सिरहाने उसकी पत्नी,बहन और खड़ी थीं. भले ही विशाल अभी भी बेहोश है और डॉक्टरों की टीम उसकी जान बचाने में जुटी है, लेकिन अब उसे लावारिस कहने वाला कोई नहीं है. पुलिस की मेहनत और इंस्टाग्राम की एक वायरल फोटो ने वो कर दिखाया, जो नामुमकिन लग रहा था.

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