प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश की जनता को संबोधित किया. अपने 30 मिनट के संबोधन में उन्होंने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधन बिल के गिरने पर खुलकर बात की. वहीं, अब पीएम मोदी के संबोधन और महिला आरक्षण बिल पर सरकार और विपक्ष के अलग-अलग नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन को निराशाजनक और राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया है. उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री ने महिलाओं के नाम पर संविधान संशोधन और परिसीमन के जरिए संघीय ढांचे पर हमला करने की कोशिश की है, जिसे लोकसभा ने विफल कर दिया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लोकतंत्र को कमजोर करने के अपने प्रयासों के लिए देश से माफी मांगें.
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने प्रधानमंत्री के संबोधन में विपक्षी दलों की आलोचना करने पर दुख जताया है. उनका कहना है कि सरकार महिला सशक्तिकरण के नाम पर ‘परिसीमन विधेयक’ (Delimitation Bill) लाकर असल में चुनावी जोड़-तोड़ की कोशिश कर रही थी.
मनोज कुमार झा ने बीजेपी पर तंज कसते हुए चुनाव आयोग से मांग की कि प्रधानमंत्री के ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ को ‘चुनावी संबोधन’ माना जाए. उन्होंने कहा कि इसका सारा खर्च बीजेपी के चुनावी खर्च में जोड़ा जाए.
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘सब कुछ पहले से प्लान किया गया था और उन्हें इसकी जानकारी थी. ये कहा जा सकता है कि बंगाल और तमिलनाडु में चुनावों को ध्यान में रखते हुए ऐसा विधेयक पेश किया गया. अगर महिलाओं के लिए उनका सम्मान वाकई में है और वो गंभीर हैं, तो उन्होंने 2023 से इस प्रस्ताव को लागू क्यों नहीं किया?’
‘अगर कल कोई महिला प्रधानमंत्री बनती है…’
भगत ने आगे कहा, ‘मोदी जी, आपका कार्यकाल पूरा हो चुका है. आपने सबसे लंबे कार्यकाल का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है. अब जब हम मातृशक्ति की बात करते हैं, तो अगर कल कोई महिला प्रधानमंत्री बनती है, तो हम उसका स्वागत करेंगे.’
एस.पी. सिंह बघेल का बयान
वहीं, बीजेपी नेता पीएम मोदी की सराहना कर रहे हैं. केंद्रीय मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी ने वादा किया है कि प्रयास जारी रहेंगे. महिलाएं गुस्से में हैं. लोकतंत्र में गुस्सा दिखाने का एक ही तरीका है कि जिन लोगों ने आपके खिलाफ मत डाला है आप भी उनके खिलाफ वोट करें.’
रवि किशन का दावा- आवाज नहीं थमने वाली
बीजेपी सांसद रवि किशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महिलाओं को लेकर संबोधन सुना. नारी सशक्तिकरण से जुड़े अहम प्रस्ताव का इस बार संसद में पारित न हो पाना निराशाजनक रहा. लेकिन ये आवाज थमने वाली नहीं है. हर महिला के सम्मान, सुरक्षा और अधिकार के लिए संघर्ष निरंतर जारी रहेगा.’
विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सशक्त भाषण विपक्ष के महिला-विरोधी और विभाजनकारी चेहरे को उजागर करता है. कांग्रेस, डीएमके, सपा और टीएमसी की सुधार-विरोधी मानसिकता के कारण देश ने कल एक ऐतिहासिक मौका खो दिया. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, हम संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण के वैध अधिकार को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.’
मायलापुर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवार तमिलिसाई सुंदरराजन ने पीएम मोदी के संबोधन पर कहा, ‘तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने नारी शक्ति अधिनियम के पारित न होने पर जश्न मनाया. राज्य का हित महिलाओं के हित से अलग कैसे हो सकता है? 2026 के इन चुनाव में नारी शक्ति कांग्रेस, DMK और इनके गठबंधन को जवाब देगी.’
‘हमारी माता-बहनें उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी’
उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी देश की आधी आबादी को आज से नहीं 2014 से सभी क्षेत्रों में नारी को तवज्जो देने का काम किया. जिस तरह विपक्ष के लोगों ने नारी शक्ति के साथ खिलवाड़ करने का काम किया है निश्चित तौर पर देश की हमारी माता-बहनें उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी.’
राज्यसभा सांसद पी.टी. उषा ने संविधान (131वां संशोधन) बिल लोकसभा में पास नहीं होने पर कहा कि हमें उम्मीद थी कि महिला आरक्षण लागू हो जाएगा. बहुत दुख हुआ. हमने महिलाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश की. अभी बिल पारित नहीं हो पाया. देखते हैं आगे क्या होगा.
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