ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के कई हफ्ते बाद भी उनके सुपुर्दे खाक को लेकर फैसला नहीं लिया जा सका है. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी इसके लिए सुरक्षा कारणों और लॉजिस्टिक चुनौतियों का हवाला दे रहे हैं.
माना जा रहा है कि ईरानी अधिकारी बड़े सार्वजनिक आयोजन से जुड़े जोखिमों का आकलन कर रहे हैं, इसके साथ ही संभावित इजरायली हमलों के खतरे और जनसभाओं के दौरान अशांति की संभावना को लेकर चिंता जताई जा रही है.
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के बेहनम तालेब्लू ने बताया कि मौजूदा हालात में सरकार इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से हिचकिचा रही है.
उन्होंने संघर्ष के बीच तेहरान के सामने मौजूद कई कमजोरियों की ओर इशारा करते हुए कहा, “सीधे शब्दों में कहें तो, शासन इतना डरा हुआ और इतना कमजोर है कि जोखिम लेने की हिम्मत नहीं कर सकता.”
अमेरिका ईरान के संयुक्त हमलों से हुई थी मौत
बता दें, 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में मारे गए, जिससे इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और भड़क गया. लेकिन इस घटना के बाद से अभी तक खामेनेई को अंतिम विदाई नहीं दी गई है. जबकि यह देरी 1989 में आयतुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के बड़े स्टेट फ़्यूनरल से बिल्कुल अलग है, जब तेहरान में लाखों लोग जुटे थे.
विशेषज्ञों का कहना है कि खामेनेई की मौत के बाद वैसी बड़ी जनभागीदारी अब तक देखने को नहीं मिली है. हवाई हमलों और अस्थिर हालात के कारण बड़े स्तर पर शोक जताने की स्थिति नहीं बन पाई है. वहीं, तालेब्लू ने यह कहा कि सरकार को आंतरिक असंतोष और सूचना नियंत्रण को लेकर चिंता है.
खबरों के मुताबिक, ईरानी अधिकारी मशहद को खामेनेई के अंतिम आयोजन के लिए संभावित जगह के तौर पर विचार कर रहे हैं. माना जा रहा है कि यहां सुरक्षा व्यवस्था बनाना भी आसान होगा.
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, 4 मार्च से शुरू होने वाले तीन दिन के स्टेट फ़्यूनरल की शुरुआती योजना को रद्द कर दिया गया, क्योंकि अमेरिका और इजरायल के बड़े पैमाने पर हमले तेज हो गए थे.
बाद में अधिकारियों ने देरी की एक वजह अत्यधिक भीड़ की उम्मीद भी बताई थी, लेकिन अब तक इसके लिए कोई नई तारीख तय नहीं की गई है.
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